इसके लिए विकसित ग्राम पंचायत प्लान (वीजीपीपी) पोर्टल तैयार किया गया है। ग्राम्य विकास आयुक्त प्रमोद कुमार उपाध्याय ने सभी जिलाधिकारियों को इस व्यवस्था को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए हैं। योजना के तहत अधिकारियों और कर्मचारियों को दो चरणों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। पहले प्रदेश मुख्यालय पर प्रशिक्षण होगा, जबकि अगले एक सप्ताह के भीतर विकासखंड और ग्राम पंचायत स्तर के कर्मचारियों को भी तकनीकी जानकारी दी जाएगी।
घरौनी और फार्मर रजिस्ट्री में भी यूपी ने बनाए बड़े आंकड़े
ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने के मामले में भी प्रदेश में काम किया जा रहा है। स्वामित्व योजना के तहत अब तक 1.05 करोड़ से अधिक घरौनियों का निर्माण और वितरण किया जा चुका है। वहीं फार्मर रजिस्ट्री के अंतर्गत 1.44 करोड़ से ज्यादा किसानों का पंजीकरण पूरा हो चुका है।
फार्मर रजिस्ट्री के माध्यम से किसानों की पहचान और उनसे जुड़ी जानकारियां एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। इससे कृषि योजनाओं का लाभ देने के लिए पात्रता सत्यापित करने में सुविधा मिल सकती है। दूसरी ओर, घरौनी से ग्रामीण परिवारों की संपत्तियों का रिकॉर्ड व्यवस्थित करने में मदद मिल रही है।
गांवों की जरूरत के हिसाब से बनेगी विकास योजना
नई व्यवस्था के तहत ग्राम पंचायतों में साक्ष्य आधारित और सैचुरेशन आधारित प्लानिंग पर जोर रहेगा। यानी गांव में सड़क, पेयजल, आवास और दूसरी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति को ध्यान में रखकर विकास कार्यों की प्राथमिकताएं तय की जाएंगी। वीजीपीपी पोर्टल के जरिए योजनाओं को डिजिटल तरीके से तैयार करने और उनकी प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाने की कोशिश होगी।
इस पहल के बाद प्रदेश की हजारों ग्राम पंचायतों को विकास की योजना बनाने में तकनीक का सहारा मिलेगा। हालांकि, इसका वास्तविक असर प्रशिक्षण पूरा होने और योजनाओं के धरातल पर लागू होने के बाद दिखाई देगा।

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