1 से 30 नवंबर तक चलेगा अभियान
डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र अभियान 1 नवंबर से 30 नवंबर तक आयोजित किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य पेंशनभोगियों को घर के पास ही डिजिटल सुविधा उपलब्ध कराना है। खासकर बुजुर्गों, दिव्यांगों और ऐसे लोगों को प्राथमिकता मिलेगी, जिन्हें शारीरिक परेशानी के कारण बैंक या कार्यालय तक पहुंचने में दिक्कत होती है। जरूरत पड़ने पर उनके घर जाकर भी प्रमाणपत्र बनाने की सुविधा दी जाएगी।
मोबाइल से चेहरे की पहचान कर बनेगा प्रमाणपत्र
इस व्यवस्था की खास बात यह है कि पेंशनभोगी अपने एंड्रॉयड या आईओएस स्मार्टफोन से भी डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र बनवा सकेंगे। इसके लिए फेस ऑथेंटिकेशन तकनीक का इस्तेमाल होगा। मोबाइल कैमरे के सामने चेहरा दिखाने के बाद पहचान का सत्यापन किया जाएगा और प्रक्रिया पूरी होने पर डिजिटल प्रमाणपत्र तैयार हो सकेगा।
बिहार के सभी जिलों में लगेंगे विशेष शिविर
पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग की ओर से राज्य के अलग-अलग जिलों और शहरों में शिविर आयोजित किए जाएंगे। यहां पेंशनभोगियों को डिजिटल प्रमाणपत्र बनाने की प्रक्रिया में सहायता मिलेगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले बुजुर्गों को भी काफी सहूलियत मिलने की उम्मीद है।
पेंशन जारी रखने के लिए जरूरी है जीवन प्रमाणपत्र
दरअसल, पेंशन का भुगतान जारी रखने के लिए हर साल जीवन प्रमाणपत्र जमा करना आवश्यक होता है। उम्र अधिक होने या स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के कारण कई पेंशनभोगियों को यह काम पूरा करने में कठिनाई होती है। ऐसे में डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र अभियान उनके लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है। इससे समय और मेहनत दोनों की बचत होगी।

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