7वें वेतन आयोग ने क्या बदला था
7वें वेतन आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2016 से लागू हुई थीं। इस आयोग ने कर्मचारियों के वेतन और भत्तों के ढांचे में बड़े बदलाव किए, जिनका असर आज तक कर्मचारियों की सोच और उम्मीदों पर दिखाई देता है। मुख्य बदलाव इस प्रकार थे:
फिटमेंट फैक्टर: सबसे अहम निर्णय फिटमेंट फैक्टर को 2.57 पर तय करना था। इसके आधार पर पुराने वेतन ढांचे से नए पे मैट्रिक्स में वेतन वृद्धि तय हुई।
ग्रेड पे समाप्त: पुराने ग्रेड पे सिस्टम को पूरी तरह हटा दिया गया और उसकी जगह पे मैट्रिक्स लागू की गई। इससे वेतन संरचना को समझना आसान हो गया।
DA में बदलाव: 7वें वेतन आयोग ने DA (Dearness Allowance) को फिर से शून्य से शुरू किया, लेकिन बेसिक पे में बड़ी बढ़ोतरी की।
लेवल-1 कर्मचारियों का उदाहरण
लेवल-1 कर्मचारियों की सैलरी में हुए बदलाव इस प्रकार हैं: बेसिक पे: 8,800 रुपये से बढ़कर 18,000 रुपये, DA: अब करीब 58%, यानी 18,000 रुपये की बेसिक पे पर लगभग 10,440 रुपये, HRA (X कैटेगरी शहर): 5,400 रुपये, कुल मासिक सैलरी (भत्तों सहित): लगभग 33,500–34,000 रुपये। इस तुलना में अन्य भत्ते और सेवा-विशेष लाभ शामिल नहीं हैं। कुल मिलाकर पिछले 10 साल में कर्मचारियों की मासिक सैलरी में लगभग 55% की बढ़ोतरी हुई है।
8वें वेतन आयोग से बढ़ी उम्मीदें
अब जब 7वें वेतन आयोग का दौर खत्म हो रहा है, कर्मचारियों की निगाहें 8वें वेतन आयोग पर टिकी हैं। कर्मचारी संगठन मांग कर रहे हैं कि: न्यूनतम बेसिक पे में वृद्धि की जाए, फिटमेंट फैक्टर में बदलाव कर वास्तविक वेतन बढ़ाया जाए। क्योंकि पिछले 10 साल में कुल सैलरी का बड़ा हिस्सा DA के जरिए बढ़ा है, बेसिक पे जस का तस रह जाने के कारण कर्मचारियों की उम्मीदें अब नए वेतन आयोग से जुड़ गई हैं।

0 comments:
Post a Comment