वैश्विक व्यापार समझौते में तेजी
भारत ने अगले साल कई बड़े देशों के साथ व्यापार समझौते की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। अमेरिका और यूरोपीय संघ (EU) के साथ व्यापार वार्ता अंतिम चरण में हैं, वहीं कनाडा और रूस के साथ भी नई समझौतों को लेकर बातचीत शुरू हो चुकी है। इन समझौतों से भारतीय उत्पादों के लिए नए बाजार खुलेंगे और निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।
चुनौतियां भी हैं सामने
हालांकि, भारत के निर्यात मार्ग में कुछ चुनौतियां भी हैं। 1 जनवरी 2026 से यूरोपीय संघ में कार्बन बार्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (सीबैम) लागू होने वाला है। इसके तहत स्टील, एल्युमीनियम और अन्य उत्पादों पर कार्बन उत्सर्जन के हिसाब से अतिरिक्त शुल्क लगेगा, जिससे यूरोपीय देशों में निर्यात महंगा हो सकता है। इसके अलावा अमेरिका के साथ व्यापार समझौते में देरी भी एक चुनौती साबित हो सकती है।
सेवा निर्यात करेगा रिकॉर्ड
पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने कुल 825 अरब डॉलर का निर्यात किया था, जिसमें वस्तु का हिस्सा 438 अरब डॉलर और सेवा निर्यात का हिस्सा 387 अरब डॉलर था। इस साल सेवा निर्यात पहली बार 400 अरब डॉलर के स्तर को पार करने की ओर बढ़ रहा है। इसी मदद से कुल निर्यात 850 अरब डॉलर तक पहुंचने की संभावना है।
2030 का महत्वाकांक्षी लक्ष्य
वाणिज्य विभाग का लक्ष्य है कि वर्ष 2030 तक भारत का निर्यात एक लाख करोड़ डॉलर तक पहुंचे। नए व्यापार समझौतों और शुल्क मुक्त बाजार की मदद से यह लक्ष्य हासिल करना आसान होगा। निर्यात में तेजी से न सिर्फ अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। उत्पादक और सेवा क्षेत्र के उद्यमियों के लिए यह बड़े निवेश और विकास के अवसर ला सकता है।

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