बिहार सरकार का फैसला, राज्य में ई-नीलामी के नए नियम लागू

पटना। बिहार सरकार ने खनन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब राज्य में पत्थर खदानों की बंदोबस्ती नई व्यवस्था के तहत ई-नीलामी (ऑनलाइन नीलामी) के माध्यम से की जाएगी। सरकार का मानना है कि इस नई प्रक्रिया से न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि राज्य के राजस्व में भी वृद्धि होगी और खनन से जुड़ी अनियमितताओं पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।

अब ऑनलाइन होगी पत्थर खदानों की नीलामी

नई व्यवस्था के अनुसार पत्थर खदानों का आवंटन पूरी तरह ई-नीलामी प्रक्रिया से किया जाएगा। इस प्रक्रिया की जिम्मेदारी संबंधित जिले के जिलाधिकारी (डीएम) के स्तर पर होगी। ऑनलाइन नीलामी लागू होने से सभी इच्छुक प्रतिभागियों को समान अवसर मिलेगा और पूरी प्रक्रिया डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होने के कारण पारदर्शिता भी बढ़ेगी।

सुरक्षित मूल्य में 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी

सरकार ने पहले वर्ष के लिए खदानों के सुरक्षित मूल्य (रिजर्व प्राइस) में 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी करने का फैसला लिया है। नई व्यवस्था के तहत पहले जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट के आधार पर यह तय किया जाएगा कि किसी खदान से एक वर्ष में कितनी मात्रा में पत्थर का खनन किया जा सकता है। इसके बाद निर्धारित स्वामित्व दर के आधार पर मूल्य निकाला जाएगा और उसमें 25 प्रतिशत अतिरिक्त जोड़कर पहले वर्ष का सुरक्षित मूल्य तय किया जाएगा।

इन जिलों में शुरू हुई प्रक्रिया

खनन विभाग ने राज्य के कई जिलों में नई व्यवस्था लागू करने की दिशा में काम शुरू कर दिया है। फिलहाल जिन जिलों में जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, उनमें शामिल हैं गया, रोहतास, औरंगाबाद, शेखपुरा, बांका। वहीं, नवादा जिले की जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट पहले ही स्वीकृत की जा चुकी है।

जनता से मांगे जा रहे सुझाव

नई व्यवस्था लागू करने से पहले संबंधित जिलों की जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट का प्रारूप सार्वजनिक किया गया है। इसके लिए निर्धारित अवधि तक आम नागरिकों और संबंधित पक्षों से सुझाव और आपत्तियां भी आमंत्रित की जा रही हैं। सरकार का उद्देश्य है कि सभी आवश्यक सुझावों पर विचार करने के बाद अंतिम रिपोर्ट तैयार की जाए, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की विवाद की स्थिति न बने।

ई-नीलामी से क्या होंगे फायदे?

नई प्रणाली लागू होने के बाद कई महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं:

खदान आवंटन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी।

सरकारी राजस्व बढ़ने की संभावना रहेगी।

नीलामी प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।

डिजिटल प्रणाली से अनियमितताओं की संभावना कम होगी।

खनन क्षेत्र में प्रशासनिक निगरानी और जवाबदेही मजबूत होगी।

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