कीमत के आधार पर लगेगा दोपहिया वाहनों पर टैक्स
नई व्यवस्था के तहत दोपहिया वाहनों को उनकी एक्स-शोरूम कीमत के अनुसार अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है।
1 लाख रुपये तक कीमत वाली बाइक या स्कूटर पर एक्स-शोरूम कीमत का 9% टैक्स देना होगा।
1 लाख से 8 लाख रुपये तक की कीमत वाले दोपहिया वाहन पर 10% टैक्स लागू होगा।
8 लाख से 15 लाख रुपये तक की कीमत वाले दोपहिया वाहन पर 11% टैक्स देना होगा।
15 लाख रुपये से अधिक कीमत वाले दोपहिया वाहन पर 13% एकमुश्त टैक्स लिया जाएगा।
इस नई व्यवस्था के तहत वाहन की कीमत जितनी अधिक होगी, टैक्स की दर भी उसी अनुसार बढ़ेगी।
तिपहिया वाहनों के लिए भी नए प्रावधान
सरकार ने तिपहिया वाहनों के टैक्स ढांचे में भी बदलाव किया है।
चार सीट क्षमता वाले नए तिपहिया वाहन के लिए 15 वर्षों का एकमुश्त टैक्स 11,000 रुपये तय किया गया है। वहीं वाहन मालिक चाहें तो पहले 10 वर्षों के लिए अलग और अगले 5 वर्षों के लिए अलग टैक्स जमा करने का विकल्प भी चुन सकते हैं। इसी तरह सात सीट क्षमता वाले नए तिपहिया वाहन के लिए 15 वर्षों का एकमुश्त टैक्स 16,000 रुपये निर्धारित किया गया है। इनके लिए भी चरणबद्ध भुगतान का विकल्प उपलब्ध रहेगा।
व्यापारियों और निर्माताओं के लिए भी बदले नियम
नई अधिसूचना में वाहन डीलरों और निर्माताओं के लिए भी कर संबंधी प्रावधान तय किए गए हैं।
मोटरसाइकिल पर व्यापारी या निर्माता के अधीन प्रति वाहन 600 रुपये वार्षिक कर देना होगा।
भारी वाहनों की चेसिस पर 1,000 रुपये प्रति वर्ष कर निर्धारित किया गया है।
अन्य वाहनों के लिए 800 रुपये वार्षिक कर लागू रहेगा।
वाहन खरीदने वालों पर क्या होगा असर?
नई कर व्यवस्था लागू होने के बाद नई बाइक या अन्य वाहन खरीदते समय ग्राहकों को पहले की तुलना में कुल खर्च का सही आकलन करना होगा। वाहन की एक्स-शोरूम कीमत के साथ अब लागू टैक्स भी बजट का महत्वपूर्ण हिस्सा बनेगा। विशेष रूप से महंगी मोटरसाइकिल खरीदने वाले ग्राहकों पर अधिक टैक्स का प्रभाव दिखाई देगा, जबकि सामान्य श्रेणी की बाइक खरीदने वालों के लिए भी नई दरें लागू होंगी।
सरकार का उद्देश्य
राज्य सरकार का कहना है कि नई टैक्स व्यवस्था का उद्देश्य वाहन कर प्रणाली को अधिक व्यवस्थित बनाना और राजस्व संग्रह को मजबूत करना है। साथ ही वाहन की कीमत के अनुसार कर निर्धारित करने से व्यवस्था अधिक स्पष्ट और श्रेणीबद्ध होगी।

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