प्रशासकों के अधिकार होंगे स्पष्ट
पंचायती राज विभाग के अनुसार, पंचायत प्रतिनिधियों को पहली बार प्रशासक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ऐसे में कई स्थानों पर यह सवाल उठने लगे कि प्रशासक के रूप में वे किस सीमा तक निर्णय ले सकते हैं। इसी स्थिति को देखते हुए विभाग विस्तृत दिशा-निर्देश तैयार कर रहा है, ताकि पूरे प्रदेश में एक समान व्यवस्था लागू हो सके। गाइडलाइन जारी होने के बाद प्रशासकों को स्पष्ट रूप से पता होगा कि वे कौन से प्रशासनिक और नियमित कार्य कर सकते हैं तथा किन मामलों में उन्हें नए नीतिगत फैसले लेने की अनुमति नहीं होगी।
विकास कार्यों पर नहीं पड़ेगा असर
सरकार का प्रयास है कि पंचायतों में चल रहे विकास कार्य, जनकल्याण योजनाएं और रोजमर्रा के प्रशासनिक कार्य बिना किसी बाधा के चलते रहें। इसलिए गाइडलाइन में ऐसे प्रावधान शामिल किए जा रहे हैं, जिससे आवश्यक भुगतान, साफ-सफाई, पेयजल, स्ट्रीट लाइट, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और अन्य नियमित कार्य समय पर पूरे होते रहें। साथ ही यह भी तय किया जाएगा कि नई योजनाओं की मंजूरी, बड़े वित्तीय निर्णय या दीर्घकालिक नीतिगत मामलों में प्रशासकों की भूमिका क्या होगी।
अधिकारियों से मांगी जा रही थी जानकारी
प्रशासक बनाए जाने के बाद कई निवर्तमान ग्राम प्रधानों और जिला पंचायत अध्यक्षों ने जिला पंचायत राज अधिकारियों और जिला पंचायत के अधिकारियों से अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों को लेकर जानकारी लेनी चाही। हालांकि, स्पष्ट दिशा-निर्देश उपलब्ध न होने के कारण सभी स्थानों पर एक जैसी जानकारी नहीं मिल पा रही थी। इसी स्थिति को देखते हुए पंचायती राज विभाग ने पूरे प्रदेश के लिए एक विस्तृत गाइडलाइन तैयार करने का निर्णय लिया है।
ब्लॉक प्रमुखों को भी मिल सकती है जिम्मेदारी
प्रदेश के 826 ब्लॉक प्रमुखों का कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि सरकार उन्हें भी प्रशासक नियुक्त करने संबंधी आदेश जारी कर सकती है। यदि ऐसा होता है, तो ब्लॉक स्तर पर भी प्रशासनिक कार्यों की निरंतरता बनी रहेगी और विकास कार्य प्रभावित नहीं होंगे।

0 comments:
Post a Comment