बिहार में अधिकारियों की छुट्टियों को लेकर नई व्यवस्था लागू

पटना। बिहार सरकार के मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग ने अधिकारियों की छुट्टियों को लेकर नई व्यवस्था लागू कर दी है। नए निर्देशों के तहत अब विभाग के अधिकारियों को अवकाश पर जाने से पहले विभागीय मुख्यालय से अनिवार्य स्वीकृति लेनी होगी। मुख्यालय की मंजूरी के बिना किसी भी प्रकार की छुट्टी मान्य नहीं होगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य अवकाश प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और व्यवस्थित बनाना है।

किन अधिकारियों पर लागू होगा नया नियम?

विभाग द्वारा जारी निर्देश बिहार निबंधन सेवा और बिहार मद्यनिषेध सेवा के अधिकारियों पर लागू होंगे। इनमें प्रमुख रूप से सहायक निबंधन महानिरीक्षक, मद्यनिषेध उपायुक्त, जिला अवर निबंधक, अवर निबंधक, मद्यनिषेध सहायक आयुक्त, मद्यनिषेध अधीक्षक शामिल हैं। इन सभी अधिकारियों को अब अवकाश लेने से पहले निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य होगा।

मुख्यालय की मंजूरी होगी पहली शर्त

नई व्यवस्था के अनुसार कोई भी अधिकारी सीधे छुट्टी पर नहीं जा सकेगा। सबसे पहले उसे विभागीय मुख्यालय से अवकाश की स्वीकृति प्राप्त करनी होगी। यदि मुख्यालय से अनुमति नहीं मिलती है, तो अवकाश मान्य नहीं माना जाएगा। इससे अधिकारियों की उपस्थिति और प्रशासनिक व्यवस्था पर विभाग की सीधी निगरानी बनी रहेगी।

डीएम से भी लेनी होगी अनुमति

मुख्यालय से स्वीकृति मिलने के बाद भी प्रक्रिया पूरी नहीं होगी। संबंधित अधिकारी को अपने जिले के जिलाधिकारी (डीएम) से मुख्यालय छोड़ने की अनुमति लेनी होगी। इसके बाद ही वह अवकाश का लाभ उठा सकेगा। साथ ही छुट्टी से संबंधित जानकारी विभागीय मुख्यालय को उपलब्ध कराना भी आवश्यक होगा।

सात दिन पहले करना होगा आवेदन

विभाग ने अवकाश आवेदन की समय-सीमा भी निर्धारित कर दी है। सामान्य परिस्थितियों में अधिकारियों को छुट्टी के लिए कम से कम सात दिन पहले आवेदन करना होगा। केवल विशेष या आपातकालीन स्थितियों में इस नियम में छूट दी जा सकती है।

डिजिटल माध्यम से होगी पूरी प्रक्रिया

नई व्यवस्था के तहत अवकाश आवेदन केवल डिजिटल माध्यम से स्वीकार किए जाएंगे। इससे आवेदन और स्वीकृति की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन रिकॉर्ड में रहेगी, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और अनावश्यक देरी या भ्रम की स्थिति कम होगी।

क्यों किया गया यह बदलाव?

विभाग का मानना है कि नई व्यवस्था लागू होने से अधिकारियों की उपलब्धता पर बेहतर निगरानी रखी जा सकेगी। साथ ही प्रशासनिक कार्यों की निरंतरता बनी रहेगी और छुट्टियों का प्रबंधन अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा। डिजिटल प्रक्रिया अपनाने से रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा और जवाबदेही भी बढ़ेगी।

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