दुनिया में 5 देश बनाते हैं जेट इंजन, भारत की क्या है स्थिति?

नई दिल्ली। जेट इंजन किसी भी आधुनिक वायुसेना और विमानन उद्योग की रीढ़ माने जाते हैं। लड़ाकू विमान हो या यात्री विमान, उनकी ताकत और क्षमता काफी हद तक जेट इंजन पर निर्भर करती है। दुनिया में विमान बनाने वाले देश कई हैं, लेकिन पूरी तरह स्वदेशी जेट इंजन डिजाइन और निर्माण करने की क्षमता केवल गिने-चुने देशों के पास ही है। यही वजह है कि जेट इंजन तकनीक को रणनीतिक और अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है।

कौन से हैं वे 5 देश?

वर्तमान समय में दुनिया के सिर्फ 5 देश ऐसे हैं जो उन्नत जेट इंजन विकसित और निर्मित करने में सक्षम माने जाते हैं:

1 .अमेरिका: जेट इंजन तकनीक में अमेरिका सबसे आगे है। जनरल इलेक्ट्रिक (GE) और प्रैट एंड व्हिटनी जैसी कंपनियां अत्याधुनिक लड़ाकू और नागरिक जेट इंजन बनाती हैं।

2 .रूस: रूस लंबे समय से सैन्य जेट इंजन निर्माण में मजबूत रहा है। उसके इंजन सुखोई और मिग जैसे लड़ाकू विमानों में इस्तेमाल होते हैं।

3 .फ्रांस: फ्रांस की कंपनी सफ्रान (Safran) लड़ाकू और नागरिक दोनों तरह के जेट इंजन बनाती है। राफेल विमान का इंजन इसका बड़ा उदाहरण है।

4 .ब्रिटेन: रोल्स-रॉयस दुनिया की अग्रणी जेट इंजन निर्माता कंपनियों में से एक है, जो सैन्य और कमर्शियल दोनों सेक्टर में सक्रिय है।

5 .चीन: चीन ने पिछले कुछ वर्षों में जेट इंजन तकनीक में तेज़ी से प्रगति की है और अब वह अपने लड़ाकू विमानों के लिए स्वदेशी इंजन विकसित कर रहा है, हालांकि इस क्षेत्र में वह अभी भी सुधार की प्रक्रिया में है।

भारत की स्थिति क्या है?

भारत दुनिया के बड़े विमान उपयोगकर्ताओं और रक्षा आयातकों में शामिल है, लेकिन अब तक पूरी तरह सफल स्वदेशी जेट इंजन विकसित करने में भारत को सफलता नहीं मिली है। भारत में जेट इंजन विकास की जिम्मेदारी मुख्य रूप से डीआरडीओ के तहत गैस टर्बाइन रिसर्च एस्टैब्लिशमेंट (GTRE) के पास है।

स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस के लिए विकसित किया गया कावेरी इंजन तकनीकी चुनौतियों के कारण पूरी तरह सफल नहीं हो पाया। फिलहाल तेजस विमान में अमेरिका का बना विदेशी जेट इंजन का उपयोग किया जा रहा है। हालांकि, सरकार और रक्षा संस्थान अब विदेशी साझेदारी के साथ स्वदेशी जेट इंजन विकसित करने की दिशा में काम कर रहे हैं। उन्नत सामग्री, सिंगल क्रिस्टल ब्लेड और हाई-थ्रस्ट इंजन तकनीक पर तेजी से शोध चल रहा है।

0 comments:

Post a Comment