दुनिया की नई धुरी बनता भारत, महाशक्तियों की कतार में शामिल

नई दिल्ली। वैश्विक अर्थव्यवस्था में लंबे समय तक अमेरिका और चीन का दबदबा रहा है, लेकिन अब तस्वीर तेजी से बदल रही है। भारत न सिर्फ इस दौड़ में शामिल हुआ है, बल्कि अपनी रफ्तार से दुनिया का ध्यान खींच रहा है। केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के हालिया बयान इसी बदलते भारत की कहानी को बयां करते हैं। उनका कहना है कि भारत आज वैश्विक औसत से करीब तीन गुना तेज गति से आगे बढ़ रहा है और आने वाले वर्षों में यह मजबूती और साफ दिखाई देगी।

चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में भारत

अंतरराष्ट्रीय आर्थिक अनुमानों के अनुसार भारत आज दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। कुछ वर्ष पहले तक जो देश शीर्ष दस में भी नीचे था, वह अब जर्मनी और जापान जैसे विकसित देशों के बराबर खड़ा नजर आता है। यह बदलाव किसी एक कारण से नहीं, बल्कि लगातार बढ़ते उत्पादन, निवेश और खपत का नतीजा है।

एक दशक में दोगुनी से ज्यादा हुई अर्थव्यवस्था

पिछले दस वर्षों में भारत की अर्थव्यवस्था में जबरदस्त विस्तार देखने को मिला है। नाममात्र जीडीपी में सौ प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी यह दिखाती है कि भारत ने वैश्विक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद अपनी विकास यात्रा को नहीं रोका। यही वजह है कि भारत को आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में गिना जा रहा है।

जर्मनी से आगे निकलने की राह

यूरोप की मजबूत अर्थव्यवस्थाओं में शामिल जर्मनी आज धीमी वृद्धि की समस्या से जूझ रहा है। उम्रदराज आबादी, ऊर्जा संकट और वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता ने उसकी रफ्तार को सीमित किया है। इसके उलट भारत युवा जनसंख्या, बढ़ते बाजार और तकनीकी विस्तार के दम पर आगे बढ़ रहा है, जिससे दोनों के बीच का अंतर तेजी से घट रहा है।

तीसरीअर्थव्यवस्था की ओर

सरकार के शीर्ष नेतृत्व का भरोसा है कि भारत जल्द ही दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। यह केवल आंकड़ों की उपलब्धि नहीं होगी, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन में एक बड़ा बदलाव साबित होगी। आज भारत आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है और यही आत्मविश्वास उसे आने वाले समय में वैश्विक नेतृत्व की भूमिका के और करीब ले जाता है।

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