भारत ने खेला नया खेल, अमेरिका हैरान! ट्रंप भी देखते रह गए

नई दिल्ली। वर्ष 2025 में अमेरिका ने भारतीय निर्यात पर लगभग 50 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने का फैसला किया, जिससे भारत के निर्यातकों के सामने बड़ी चुनौती आ गई। अमेरिका भारतीय व्यापार का एक अहम साझेदार रहा है, इसलिए यह कदम तुरंत निर्यात पर असर डाल सकता था। लेकिन भारत ने जो खेल खेला जिससे पूरी स्थिति ही बदल गई।

बाजारों का विविधीकरण बना सफलता की कुंजी

व्यापार मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि भारतीय निर्यातकों ने अमेरिका पर निर्भरता कम कर नए बाजारों पर ध्यान केंद्रित किया। एशिया, अफ्रीका, मध्य-पूर्व और लैटिन अमेरिका के बाजारों में प्रवेश ने अमेरिकी शुल्क के नकारात्मक प्रभाव को काफी हद तक कम कर दिया।

वैश्विक संकटों में भी दिखाया लचीलापन

बीते कुछ वर्षों में वैश्विक व्यापार कई संकटों से गुजरा है। कोविड-19 महामारी, रूस-यूक्रेन युद्ध, इजराइल-हमास संघर्ष, लाल सागर शिपिंग संकट और सेमीकंडक्टर आपूर्ति में बाधाओं ने आपूर्ति शृंखला को प्रभावित किया। इसके बावजूद भारत ने तेजी से अनुकूलन करते हुए निर्यात को बनाए रखा।

निर्यात आंकड़े बताते हैं मजबूती

भारत का वस्तु निर्यात 2020 में लगभग 276.5 अरब डॉलर था, जो 2021 में बढ़कर 395.5 अरब डॉलर और 2022 में 453.3 अरब डॉलर तक पहुंच गया। वैश्विक मंदी के कारण 2023 में यह घटकर 389.5 अरब डॉलर रहा, लेकिन 2024 में निर्यात फिर से बढ़कर 443 अरब डॉलर तक पहुँच गया। जनवरी से नवंबर 2025 तक निर्यात लगभग 407 अरब डॉलर दर्ज किया गया।

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का कुल माल और सेवा निर्यात 825.25 अरब डॉलर के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया, जिसमें सालाना आधार पर 6% से अधिक की वृद्धि हुई। चालू वित्त वर्ष 2025-26 के अप्रैल से नवंबर के बीच निर्यात 562 अरब डॉलर रहा।

2026 के लिए सकारात्मक संकेत

सरकार को उम्मीद है कि अगले वर्ष भारत का निर्यात मजबूत बनेगा। ब्रिटेन, ओमान और न्यूजीलैंड के साथ प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते लागू होने से भारतीय वस्तुओं और सेवाओं को और बेहतर बाजार पहुंच मिलेगी। इसके अलावा अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ व्यापार समझौतों की संभावनाओं ने निर्यातकों का भरोसा बढ़ाया है।

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