जोखिम भरे सफर से मिलेगी मुक्ति
अब तक स्थानीय लोग कृष्णी नदी को पार करने के लिए एक अस्थायी और वैकल्पिक पुल का सहारा लेते थे। यह पुल न केवल संकरा था, बल्कि बेहद असुरक्षित भी था। बरसात के मौसम में नदी का जलस्तर बढ़ते ही यह बह जाता था, जिससे लोगों को जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ती थी। स्कूली बच्चे, किसान और रोज़मर्रा के काम से आने-जाने वाले लोग लंबे समय से स्थायी पुल की मांग कर रहे थे।
शासन से मिली मंजूरी
लगातार उठ रही मांगों के बाद अब सरकार ने इस समस्या पर संज्ञान लिया है। कृष्णी नदी पर असारा गांव की ओर से पक्के पुल के साथ-साथ एप्रोच रोड का निर्माण भी किया जाएगा, ताकि आवागमन पूरी तरह सुगम हो सके। इस पुल के बन जाने से ग्रामीणों को लंबे चक्कर काटने या नदी पार करने के जोखिम से छुटकारा मिलेगा।
कई गांवों को होगा सीधा फायदा
इस परियोजना से असारा, टीकरी, सूजती, बूढ़पुर समेत आसपास के दर्जनभर गांवों के लोगों को राहत मिलेगी। किसान अपनी फसल आसानी से मंडियों तक पहुंचा सकेंगे, छात्रों का स्कूल जाना आसान होगा और आपात स्थिति में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच भी तेज़ होगी।
जनप्रतिनिधि की पहल की भूमिका
छपरौली विधायक अजय कुमार ने बताया कि कृष्णी नदी पर पुल न होना क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक था। उन्होंने कई बार मुख्यमंत्री के समक्ष यह मुद्दा रखा। उनके अनुसार, लगातार प्रयासों और जनहित को देखते हुए आखिरकार शासन ने बजट स्वीकृत किया।

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