आर्मी में कैसे होता है 'कोर्ट मार्शल', क्या है प्रक्रिया?

नई दिल्ली: आर्मी में जब किसी सैनिक पर गंभीर आरोप लगता है, तो उसकी जांच और न्यायिक प्रक्रिया के लिए कोर्ट मार्शल का आयोजन किया जाता है। कोर्ट मार्शल एक विशेष मिलिट्री कोर्ट होती है, जो सेना के जवानों और अधिकारियों के ख़िलाफ़ अपराधों की सुनवाई करती है। यह प्रक्रिया सामान्य कोर्ट की तुलना में पूरी तरह से सेना के नियमों और कायदों के आधार पर चलती है।

कोर्ट मार्शल की प्रक्रिया:

कोर्ट ऑफ़ इंक्वायरी (COI): किसी भी सैनिक पर आरोप लगने के बाद सबसे पहली प्रक्रिया होती है कोर्ट ऑफ़ इंक्वायरी (COI)। इसमें आरोप की सत्यता की जांच की जाती है। COI में आरोपों से संबंधित गवाहों के बयान दर्ज किए जाते हैं और सभी उपलब्ध साक्ष्यों को इकट्ठा किया जाता है।

अस्थायी आरोप पत्र (Charge Sheet): COI के निष्कर्षों के आधार पर, आरोपी सैनिक के ख़िलाफ़ एक अस्थायी आरोप पत्र तैयार किया जाता है। यह आरोप पत्र सैनिक के कमांडिंग ऑफिसर द्वारा तैयार किया जाता है और इसमें आरोपों के बारे में विस्तार से बताया जाता है।

सुनवाई की प्रक्रिया: आरोप पत्र तैयार होने के बाद, संबंधित सैनिक के खिलाफ सुनवाई शुरू होती है। इसमें सैनिक पर लगे आरोपों की विस्तार से सुनवाई होती है और सभी साक्ष्यों को प्रस्तुत किया जाता है। इसके दौरान आरोपी को अपने बचाव का मौका भी दिया जाता है। आरोपी के पास अपने बचाव में गवाह पेश करने और साक्ष्य प्रस्तुत करने का अधिकार होता है।

जनरल कोर्ट मार्शल (GCM): यदि मामले की गंभीरता को देखते हुए सामान्य सुनवाई से मामला हल नहीं होता, तो जनरल कोर्ट मार्शल की प्रक्रिया शुरू होती है। यह सबसे उच्च स्तर की कोर्ट मार्शल होती है, जिसमें सुनवाई और फैसले की प्रक्रिया बहुत अधिक संगठित और गंभीर होती है। इसमें वरिष्ठ अधिकारी और न्यायधीश शामिल होते हैं। जनरल कोर्ट मार्शल में किसी सैनिक को सज़ा देने का निर्णय नहीं लिया जाता, बल्कि सज़ा का प्रस्ताव संबंधित कमांड को भेजा जाता है।

सज़ा का प्रस्ताव: कोर्ट मार्शल में सुनवाई के बाद यदि आरोपी को दोषी पाया जाता है, तो कोर्ट उसे सज़ा का प्रस्ताव देती है। हालांकि, सज़ा का ऐलान कोर्ट मार्शल में नहीं होता। यह सज़ा का प्रस्ताव सैनिक के कमांडिंग ऑफिसर या उच्च अधिकारी को भेजा जाता है, जो अंतिम निर्णय लेते हैं।

सज़ा की घोषणा: सज़ा का प्रस्ताव कमांड को भेजे जाने के बाद, संबंधित कमांडिंग अधिकारी अंतिम सज़ा का ऐलान करता है। सज़ा की प्रकृति आरोप की गंभीरता पर निर्भर करती है, जो निम्नलिखित हो सकती है: सशस्त्र बलों से बर्खास्तगी, कड़ी सजा जैसे कारावास या एक सीमा तक वेतन कटौती या अन्य दंड आदि।

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