चीन ने 19 बार किया है 'वीटो पावर' का इस्तेमाल

न्यूज डेस्क: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस और चीन के पास वीटो पावर का अधिकार  दिया गया है। यह वीटो पावर इन देशों को किसी भी प्रस्ताव को अस्वीकार करने का अधिकार देता है, जिससे उस प्रस्ताव का पारित होना असंभव हो जाता है। 

वीटो पावर का उपयोग सुरक्षा परिषद के निर्णयों को प्रभावित करता है और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में इन देशों की भूमिका को महत्वपूर्ण बनाता है। मार्च 2024 तक वीटो पावर के इस्तेमाल का विश्लेषण करते हुए, हम देखेंगे कि विभिन्न देशों ने इसे कितनी बार उपयोग किया है और इसके प्रभाव क्या रहे हैं।

वीटो पावर का उपयोग: आंकड़े और घटनाएँ

1. रूस (128 बार)

रूस ने सबसे अधिक 128 बार वीटो पावर का इस्तेमाल किया है। रूस का वीटो मुख्य रूप से यूक्रेन, सीरिया और मध्य पूर्व जैसे विवादों से जुड़ा हुआ है। रूस ने सुरक्षा परिषद के विभिन्न प्रस्तावों को अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए नकारा है, खासकर उन प्रस्तावों को जो रूस के प्रतिकूल थे। उदाहरण स्वरूप, सीरिया में असद शासन के खिलाफ प्रस्तावों को रूस ने वीटो किया है।

2. अमेरिका (85 बार)

अमेरिका ने 85 बार वीटो पावर का इस्तेमाल किया है। अमेरिका का वीटो अक्सर मध्य पूर्व में इज़राइल के पक्ष में होता है। सुरक्षा परिषद में इज़राइल के खिलाफ कई प्रस्तावों को अमेरिका ने वीटो किया है। इसके अलावा, अमेरिका ने कई बार रूस और चीन द्वारा पेश किए गए प्रस्तावों को भी नकारा है, जो उसके वैश्विक हितों के खिलाफ थे।

3. ब्रिटेन (29 बार)

ब्रिटेन ने 29 बार वीटो पावर का इस्तेमाल किया है। ब्रिटेन का वीटो आमतौर पर यूरोप और वैश्विक सुरक्षा मामलों से संबंधित होता है। ब्रिटेन ने भी कुछ मामलों में अमेरिका और फ्रांस के साथ मिलकर प्रस्तावों का विरोध किया है, खासकर जब वह उनके राष्ट्रीय हितों के खिलाफ थे।

4. चीन (19 बार)

चीन ने 19 बार वीटो पावर का इस्तेमाल किया है। चीन का वीटो मुख्य रूप से एशियाई मामलों, विशेषकर ताइवान और तिब्बत जैसे मुद्दों पर केंद्रित रहा है। चीन ने संयुक्त राष्ट्र में कई प्रस्तावों को नकारा है, जो उसकी संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरे का कारण बन सकते थे। इसके अलावा, चीन ने पाकिस्तान और अन्य देशों के समर्थन में भी वीटो किया है, जब कोई प्रस्ताव भारत के खिलाफ था।

5. फ्रांस (18 बार)

फ्रांस ने 18 बार वीटो पावर का उपयोग किया है। फ्रांस का वीटो मुख्य रूप से यूरोपीय देशों और अफ्रीकी मामलों से संबंधित रहा है। फ्रांस ने विशेष रूप से अफ्रीका में सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों को नकारा है, जहां फ्रांस का एक अहम हित है। इसके अलावा, फ्रांस ने कई बार ऐसे प्रस्तावों को भी नकारा है जो उसके राष्ट्रीय सुरक्षा या सैन्य अभियानों के खिलाफ थे।

वीटो पावर का वैश्विक प्रभाव

वीटो पावर का वैश्विक राजनीति में बड़ा प्रभाव होता है। यह देशों को वैश्विक निर्णयों को प्रभावित करने का अवसर देता है, लेकिन इसके साथ ही यह सुरक्षा परिषद की कार्यकुशलता और प्रभावशीलता को भी चुनौती देता है। कई बार वीटो के कारण सुरक्षा परिषद महत्वपूर्ण निर्णय नहीं ले पाती, जिससे अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के मुद्दे लंबित रहते हैं।

सुरक्षा परिषद में वीटो पावर का उपयोग अक्सर शक्ति के राजनीतिक खेल में बदल जाता है, जहां प्रमुख शक्तियाँ अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देती हैं। इससे कई बार यह महसूस होता है कि छोटे और कमजोर देशों की आवाज दब जाती है, क्योंकि वे वीटो पावर वाले देशों के फैसलों के आगे प्रभावी ढंग से अपनी बात नहीं रख पाते।

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