उत्पादन लागत में कमी, मुनाफा बढ़ेगा
मशरूम की खेती में तापमान और नमी को नियंत्रित करने के लिए बिजली का व्यापक उपयोग होता है। फिलहाल, महंगी बिजली के कारण उत्पादन लागत बढ़ रही थी, जिससे किसानों का मुनाफा कम हो रहा था। प्रस्तावित दर से किसानों की प्रति किलो उत्पादन लागत में भारी कमी आएगी। इसका सीधा फायदा प्रमुख मशरूम उत्पादक जिलों में होगा, और नए युवा तथा महिलाएं इस क्षेत्र में निवेश के लिए प्रेरित होंगे।
मौजूदा दरों की तुलना में राहत
वर्तमान में ग्रामीण इलाकों में 1 से 100 यूनिट बिजली पर 3.35 रुपये प्रति यूनिट और 100 यूनिट से अधिक पर 4.21 रुपये प्रति यूनिट की दर लागू है। शहरी इलाकों में पांच किलोवाट तक के कनेक्शन पर 5.67 रुपये प्रति यूनिट और 5-70 किलोवाट तक के कनेक्शन पर 100 यूनिट तक 5.67 रुपये और उससे अधिक खपत पर 6.44 रुपये प्रति यूनिट चुकाने पड़ते हैं। प्रस्तावित 55 पैसे प्रति यूनिट की दर इन सभी दरों की तुलना में किसानों के लिए बड़ी राहत साबित होगी।
कम लागत में शुरुआत का अवसर
एकीकृत बागवानी विकास मिशन के तहत छोटे पैमाने पर मशरूम उत्पादन इकाइयां शुरू की जा रही हैं। प्रत्येक इकाई की लागत 2 लाख रुपये है, जिसमें सरकार 1 लाख रुपये तक का अनुदान देगी। यह इकाई 200 वर्ग फुट के क्षेत्र में स्थापित की जाएगी।
बाजार में बेहतर मूल्य के लिए योजना
राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत मशरूम उत्पादन, कम्पोस्ट और स्पॉन निर्माण इकाइयों के लिए विशेष योजना बनाई गई है। इससे उत्पादकों को उत्पादन की गुणवत्ता सुरक्षित रखने के साथ बाजार में बेहतर मूल्य प्राप्त करने में मदद मिलेगी। योजना के तहत प्राइवेट और पब्लिक दोनों तरह की इकाइयों के निर्माण में सहायता प्रदान की जाएगी।

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