इस संबंध में भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग द्वारा शासनादेश भी जारी किया गया है, ताकि उपखनिजों के आवागमन को नियंत्रित किया जा सके। भूतत्व एवं खनिकर्म निदेशक, माला श्रीवास्तव ने बताया कि दूसरे राज्यों से उत्तर प्रदेश में आने वाले उपखनिजों के वाहनों की कड़ी जांच की जाएगी। इस जांच का मुख्य उद्देश्य ओवरलोडिंग और अवैध परिवहन पर कड़ी निगरानी रखना है, ताकि राज्य में खनिजों का परिवहन सुचारू और नियमों के अनुसार हो।
बता दें की यह कदम राज्य में खनिजों की अनुशासनबद्ध आपूर्ति और अवैध खनन व परिवहन पर अंकुश लगाने के लिए उठाया गया है। हालांकि, इससे निर्माण उद्योग पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ सकता है, खासकर उन लोगों के लिए जो घर बनाने की योजना बना रहे हैं। बढ़ी हुई कीमतों से निर्माण सामग्री महंगी हो सकती है, जो किसी के बजट को प्रभावित कर सकती है।
दरअसल, उत्तर प्रदेश सरकार का यह कदम राज्य के खनिज संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के लिए है, लेकिन इसके चलते घर बनाने वालों और निर्माण क्षेत्र से जुड़े लोगों को कुछ समय के लिए मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। और उन्हें पहले से अधिक कीमतों पर बालू, मौरंग और गिट्टी मिल सकती हैं।

0 comments:
Post a Comment