भारत का बड़ा कदम: 104 टन सोना लंदन से स्वदेश लौटा, वजह चौंकाने वाली

नई दिल्ली। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारत ने एक अहम रणनीतिक फैसला लेते हुए विदेशों में रखा अपना बड़ा हिस्सा सोना वापस देश में मंगाना शुरू कर दिया है। भारतीय रिज़र्व बैंक की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, बीते छह महीनों में करीब 104 टन सोना स्वदेश लाया गया है, जो देश की आर्थिक सुरक्षा नीति में बड़े बदलाव का संकेत देता है।

अब देश में ही रखा जा रहा ज्यादा सोना

रिपोर्ट के अनुसार, भारत के कुल 880 टन से अधिक स्वर्ण भंडार में से अब लगभग 77 प्रतिशत सोना देश के भीतर ही सुरक्षित रखा गया है। पहले जहां बड़ी मात्रा में सोना विदेशों के बैंकों में रखा जाता था, अब उस पर निर्भरता कम की जा रही है।

विदेशों में घटा भंडारण

पहले भारत का बड़ा हिस्सा बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स जैसे संस्थानों के पास रखा जाता था। लेकिन अब वहां जमा सोने की मात्रा में स्पष्ट कमी आई है, जो इस बात का संकेत है कि भारत अपने भंडार पर सीधा नियंत्रण बढ़ाना चाहता है।

क्यों लिया गया यह फैसला?

जानकारों के अनुसार, यह कदम केवल आर्थिक नहीं बल्कि रणनीतिक भी है। रूस-यूक्रेन युद्ध और अफगानिस्तान के विदेशी भंडार फ्रीज होने जैसे घटनाक्रमों ने कई देशों को सतर्क कर दिया है। इन हालातों में यह समझ बढ़ी है कि विदेशों में रखी संपत्तियों पर जोखिम बना रह सकता है।

सोने की बढ़ती अहमियत

आज के समय में सोना सिर्फ एक निवेश नहीं, बल्कि आर्थिक स्थिरता और सुरक्षा का प्रतीक बन चुका है। भारत के कुल विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी भी तेजी से बढ़ी है, जो यह दिखाता है कि देश अपनी वित्तीय रणनीति को और मजबूत कर रहा है।

कीमतों में उछाल का भी असर

पिछले कुछ समय में सोने की कीमतों में तेज वृद्धि हुई है, जिससे इसके कुल मूल्य में भी इजाफा हुआ है। इसी कारण विदेशी मुद्रा भंडार में सोने का प्रतिशत बढ़ गया है और यह एक मजबूत बैकअप एसेट के रूप में उभरा है।

क्या बदल रही है रणनीति?

पहले लंदन और न्यूयॉर्क जैसे वैश्विक वित्तीय केंद्रों में सोना रखना सुरक्षित और सुविधाजनक माना जाता था, लेकिन अब स्थिति बदल रही है। भारत समेत कई देश अपनी संपत्ति को अपने नियंत्रण में रखने पर जोर दे रहे हैं।

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