भारत से मिसाइल खरीदने जा रहा यह देश, चीन की बढ़ी चिंता

नई दिल्ली। भारत की रक्षा ताकत और कूटनीतिक प्रभाव लगातार मजबूत होता नजर आ रहा है। स्वदेशी सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस मिसाइल अब वैश्विक हथियार बाजार में तेजी से अपनी पहचान बना रही है। फिलीपींस के साथ सफल सौदे के बाद कई देश इस घातक मिसाइल को खरीदने में रुचि दिखा रहे हैं, जिससे भारत का रक्षा निर्यात नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है।

वियतनाम के साथ संभावित डील

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, वियतनाम भारत से ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम का प्रस्तावित भारत दौरा इस सौदे के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि करीब ₹5,800 करोड़ की इस डील में एंटी-शिप वर्जन शामिल हो सकता है, जो वियतनाम की समुद्री सुरक्षा को मजबूत करेगा।

इंडो-पैसिफिक में बदलेगा संतुलन

यह संभावित समझौता सिर्फ दो देशों के बीच व्यापारिक सौदा नहीं, बल्कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक संतुलन को भी प्रभावित कर सकता है। खासकर दक्षिण चीन सागर में बढ़ते तनाव के बीच वियतनाम की सैन्य क्षमता में यह बढ़ोतरी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

बड़ा ग्राहक बन चुका है फिलीपींस

भारत की ब्रह्मोस मिसाइल का पहला विदेशी खरीदार फिलीपींस है। साल 2022 में हुए समझौते के तहत फिलीपींस ने अपनी तटीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए इस मिसाइल को अपनाया। इस डील के बाद भारत का रक्षा निर्यात वैश्विक स्तर पर चर्चा में आया।

इंडोनेशिया और मध्य-पूर्व की भी नजर

हाल ही में इंडोनेशिया ने भी भारत के साथ ब्रह्मोस खरीदने को लेकर समझौता किया है। इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब जैसे देश भी इस मिसाइल में रुचि दिखा रहे हैं, जिससे साफ है कि मध्य-पूर्व में भी भारत की रक्षा तकनीक की मांग बढ़ रही है।

वैश्विक बाजार में बढ़ती इस मिसाइल की मांग

सिर्फ एशिया ही नहीं, बल्कि ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका जैसे देश भी इस मिसाइल को लेकर संभावनाएं तलाश रहे हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में ब्रह्मोस भारत के रक्षा निर्यात का सबसे बड़ा ब्रांड बन सकता है।

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