न्यूनतम मजदूरी से कम वेतन देना होगा नियमों के खिलाफ
नई संहिता के लागू होने के बाद सभी नियोक्ताओं को सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी का पालन करना होगा। न्यूनतम वेतन तय करते समय कर्मचारी के कौशल, कार्य की प्रकृति और कार्यस्थल के भौगोलिक क्षेत्र को आधार बनाया जाएगा। साथ ही राज्य सरकार केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित फ्लोर वेज से कम न्यूनतम मजदूरी तय नहीं कर सकेगी।
ओवरटाइम पर मिलेगा दोगुना भुगतान
यदि किसी कर्मचारी से निर्धारित समय से अधिक काम कराया जाता है, तो उसे सामान्य वेतन की तुलना में दोगुनी दर से ओवरटाइम भुगतान करना होगा। इससे अतिरिक्त समय तक काम करने वाले श्रमिकों को उनकी मेहनत का उचित पारिश्रमिक मिलने की व्यवस्था सुनिश्चित होगी।
महिला और पुरुष को मिलेगा समान वेतन
नई संहिता में समान कार्य के लिए महिला और पुरुष कर्मचारियों को समान वेतन देने का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य कार्यस्थल पर वेतन संबंधी भेदभाव को समाप्त करना और सभी कर्मचारियों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना है।
नौकरी छोड़ने पर दो दिन के भीतर मिलेगा बकाया
यदि कोई कर्मचारी नौकरी छोड़ता है या उसकी सेवा समाप्त होती है, तो नियोक्ता को उसका पूरा बकाया दो कार्य दिवस के भीतर चुकाना होगा। वहीं कर्मचारी की मृत्यु होने की स्थिति में उसकी बकाया राशि नामित व्यक्ति या वैधानिक उत्तराधिकारी को दी जाएगी।
वेतन पर्ची और संविदा श्रमिकों को भी मिलेगा संरक्षण लाभ
नई व्यवस्था के तहत वेतन का भुगतान करने से पहले कर्मचारियों को वेतन पर्ची देना अनिवार्य होगा। इसके अलावा संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) श्रमिकों की मजदूरी और बोनस का भुगतान सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी मुख्य नियोक्ता की होगी, जिससे ठेका श्रमिकों के हितों की भी बेहतर सुरक्षा हो सके।
कर्मचारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का बढ़ेगा लाभ
संहिता के अनुसार कर्मचारियों के कुल वेतन का कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा मूल वेतन (बेसिक पे) होगा। इससे भविष्य निधि (PF), कर्मचारी राज्य बीमा (ESIC) और ग्रेच्युटी जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के तहत मिलने वाले लाभ में वृद्धि होने की संभावना है। साथ ही वेतन से होने वाली वैधानिक कटौती 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी।

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