पहले क्या था नियम?
पहले रेलवे के चिकित्सा नियमों के तहत 21 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद सामान्य परिस्थितियों में अविवाहित बेटों की चिकित्सा पात्रता समाप्त हो जाती थी। ऐसे में कई कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को अपने आश्रित बच्चों के इलाज के लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ता था। अब संशोधित व्यवस्था के बाद पात्रता की शर्तें पूरी होने पर उम्र की अधिकतम सीमा लागू नहीं होगी।
किन शर्तों पर मिलेगी सुविधा?
रेलवे ने इस सुविधा का लाभ लेने के लिए कुछ स्पष्ट शर्तें निर्धारित की हैं। लाभ तभी मिलेगा जब बेटा अविवाहित हो। वह पूरी तरह संबंधित रेलवे कर्मचारी या पेंशनभोगी पर आर्थिक रूप से आश्रित हो। उसका स्थायी निवास कर्मचारी या पेंशनभोगी के समान पते पर दर्ज हो। इन शर्तों के पूरा होने पर आश्रित बेटा रेलवे की चिकित्सा सेवाओं का लाभ पहले की तरह प्राप्त कर सकेगा।
UMID पोर्टल पर अपडेट करना जरूरी
रेलवे प्रशासन ने सभी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों से कहा है कि वे अपने आश्रित बेटे का विवरण UMID पोर्टल पर समय रहते अपडेट करें। इसके साथ आवश्यक घोषणा पत्र और संबंधित दस्तावेज कार्मिक विभाग में जमा करना भी अनिवार्य होगा। यदि भविष्य में आश्रित बेटे का विवाह हो जाता है या उसका पता बदलता है, तो इसकी जानकारी भी तुरंत रिकॉर्ड में दर्ज करानी होगी।
गलत जानकारी देने पर होगी सख्त कार्रवाई
रेलवे ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच के दौरान गलत जानकारी, फर्जी दस्तावेज या किसी तथ्य को छिपाने का मामला सामने आता है, तो संबंधित व्यक्ति की चिकित्सा सुविधा तत्काल समाप्त कर दी जाएगी। इसके अलावा संबंधित कर्मचारी के खिलाफ विभागीय नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।
कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को मिलेगा बड़ा लाभ
इस नई व्यवस्था से हजारों रेलवे कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है। विशेष रूप से ऐसे परिवार, जिनके अविवाहित बेटे अभी भी उन पर आश्रित हैं, अब बिना अधिकतम आयु सीमा की बाध्यता के चिकित्सा सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे। इससे परिवारों का स्वास्थ्य संबंधी खर्च कम होगा और जरूरत पड़ने पर बेहतर उपचार आसानी से उपलब्ध हो सकेगा।

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