अगर सरकार इस मांग को मंजूरी देती है तो रेलवे, डाक विभाग, रक्षा प्रतिष्ठानों और अन्य केंद्रीय विभागों के पात्र कर्मचारियों को त्योहार के दौरान मिलने वाले बोनस में बड़ा इजाफा हो सकता है।
72 दिन के बोनस पर 41,400 रुपये तक का आधार
मौजूदा व्यवस्था में बोनस की गणना अधिकतम 7,000 रुपये मासिक सीमा को ध्यान में रखकर की जाती है। कर्मचारी संगठनों की मांग स्वीकार होने पर यह आधार बढ़कर 21,000 रुपये हो जाएगा। उदाहरण के तौर पर 72 दिन के बोनस की गणना 7,000 रुपये के आधार पर करीब 13,800 रुपये बैठती है। वहीं 21,000 रुपये की प्रस्तावित सीमा लागू होने पर यही गणना करीब 41,400 रुपये तक पहुंच सकती है। वास्तविक भुगतान संबंधित विभाग और लागू बोनस नियमों के अनुसार अलग हो सकता है।
क्यों उठी बोनस सीलिंग बढ़ाने की मांग?
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि बोनस की मौजूदा सीमा लंबे समय से नहीं बदली है, जबकि इस दौरान महंगाई और वेतन से जुड़े मानकों में बदलाव हुआ है। इसी आधार पर यूनियनों ने बोनस की गणना के लिए अधिक व्यावहारिक सीमा तय करने की मांग की है। जेसीएम की ओर से सरकार को भेजे गए पत्र में Code on Wages, 2019 से जुड़े प्रावधानों का भी उल्लेख किया गया है। कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि नई वेतन व्यवस्था के अनुरूप बोनस की सीमा में भी संशोधन होना चाहिए।
दशहरा-दीपावली से पहले फैसले की उम्मीद
कर्मचारी संगठनों की कोशिश है कि आगामी त्योहारी सीजन के बोनस आदेश जारी होने से पहले सरकार उनकी मांग पर निर्णय ले। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो पात्र केंद्रीय कर्मचारियों के त्योहारों के दौरान मिलने वाले बोनस की गणना में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। फिलहाल 21,000 रुपये की बोनस सीलिंग बढ़ाने का प्रस्ताव कर्मचारी संगठनों की मांग है, सरकार की ओर से इसकी मंजूरी का अंतिम फैसला अभी बाकी है। इसलिए कर्मचारियों को आधिकारिक आदेश का इंतजार करना होगा।

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