पुलिस मुख्यालय की गाइडलाइन के मुताबिक, थानेदार अपनी टीम के किसी योग्य अधिकारी या अपर थानेदार को यह जिम्मेदारी सौंप सकेंगे। इस व्यवस्था की निगरानी जिले के एसपी करेंगे और हर महीने अपराध समीक्षा बैठक में कम्युनिटी पुलिसिंग के कामकाज का जायजा लिया जाएगा।
हर थाने में बनेगा अलग रजिस्टर
कम्युनिटी पुलिसिंग से जुड़े कार्यक्रमों और गतिविधियों का रिकॉर्ड रखने के लिए प्रत्येक थाने में सामुदायिक पुलिसिंग पंजी तैयार की जाएगी। इसमें जनता के साथ किए गए कार्यक्रमों और स्थानीय स्तर पर किए गए कार्यों का विवरण दर्ज रहेगा।
मोहल्लों और गांवों तक पहुंचेगी पुलिस
नई व्यवस्था में बीट पुलिसिंग पर भी जोर दिया जाएगा। पुलिस अधिकारी मोहल्लों और गांवों में लोगों से संपर्क रखेंगे, ताकि समस्याओं और अपराध से जुड़ी सूचनाएं समय पर मिल सकें। स्कूल-कॉलेज, बाजार, बैंक और अस्पतालों के प्रतिनिधियों के साथ भी नियमित बैठकें करने की योजना है।
महिलाओं और बुजुर्गों पर रहेगा विशेष ध्यान
महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और वंचित वर्गों से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। पुलिस का प्रयास रहेगा कि नशाखोरी, साइबर अपराध, जमीन विवाद और अफवाह जैसी स्थानीय समस्याओं को लोगों की भागीदारी से नियंत्रित किया जाए।
चंदा लेने पर कार्रवाई, गाइडलाइन में यह भी स्पष्ट
गाइडलाइन में यह भी स्पष्ट किया गया है कि कम्युनिटी पुलिसिंग के नाम पर पुलिसकर्मी किसी से चंदा या आर्थिक मदद नहीं मांग सकेंगे। नागरिकों की निजी और गोपनीय जानकारी को सार्वजनिक करने पर भी रोक रहेगी। नियमों का उल्लंघन करने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की जाएगी।
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