घर-घर पहुंचेंगी स्वास्थ्य विभाग की टीमें
इस अभियान के तहत लोगों की स्क्रीनिंग कर बीपी, मधुमेह, कैंसर समेत कई गंभीर बीमारियों की शुरुआती पहचान की जाएगी। सरकार का उद्देश्य केवल जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि बीमारी की जानकारी मिलने के बाद लोगों को समय पर इलाज से जोड़ना भी है। सभी लाभार्थियों को आभा आईडी से जोड़कर उनकी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी डिजिटल रूप से सुरक्षित रखने पर भी जोर दिया जाएगा।
महिलाओं-किशोरियों की एनीमिया जांच
स्वास्थ्य अभियान में महिलाओं और किशोरियों पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। सरकार ने करीब 1 करोड़ महिलाओं और किशोरियों की एनीमिया जांच का लक्ष्य रखा है। इसका मकसद खून की कमी की समय रहते पहचान कर जरूरी उपचार उपलब्ध कराना है।
अस्पतालों में बढ़ेंगी इलाज की सुविधाएं
मुख्यमंत्री के मुताबिक बिहार के जिला और अनुमंडल अस्पतालों में फिलहाल करीब 36 तरह के उपचार और ऑपरेशन किए जा रहे हैं। इसे बढ़ाकर 45 प्रकार की चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में काम चल रहा है। जिला अस्पतालों में आईसीयू सुविधाओं को भी मजबूत किया जा रहा है।
7 हजार से ज्यादा नर्सों की नियुक्ति
स्वास्थ्य विभाग में 7 हजार से अधिक नर्सों की नियुक्ति का भी जिक्र किया गया। सरकार आगे जरूरत के मुताबिक स्वास्थ्यकर्मियों की भर्ती जारी रखने की बात कह रही है। साथ ही नर्सिंग कॉलेजों के विस्तार और बेहतर प्रशिक्षण पर भी जोर दिया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि स्वास्थ्य सेवाएं लोगों के घर के करीब पहुंचें और गंभीर बीमारियों की पहचान शुरुआती चरण में हो सके।
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