सरकार की इस पहल से करीब 2.13 लाख से अधिक बुनकरों को फायदा मिलने की उम्मीद है। नियमित सरकारी खरीद होने से बुनकर परिवारों की आमदनी को मजबूती मिल सकती है और पारंपरिक हथकरघा कारोबार को भी नई रफ्तार मिलेगी।
खरीद व्यवस्था को लेकर तैयार होगा रोडमैप
विधान भवन में खादी एवं ग्रामोद्योग, हथकरघा व वस्त्रोद्योग मंत्री राकेश सचान की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में इस व्यवस्था को लागू करने को लेकर चर्चा की गई। अधिकारियों को चिकित्सा संस्थानों की मांग और स्थानीय उत्पादों की आपूर्ति के बीच बेहतर तालमेल बनाने की जिम्मेदारी दी जाएगी। समय पर सामान उपलब्ध कराने के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति भी की जाएगी। ये अधिकारी चिकित्सा संस्थानों और यूपी राज्य हथकरघा निगम के बीच समन्वय बनाए रखेंगे, ताकि आपूर्ति में अनावश्यक देरी न हो।
गुणवत्ता से नहीं होगा समझौता
सरकार ने साफ किया है कि स्थानीय उत्पादों की खरीद का मतलब गुणवत्ता से समझौता करना नहीं होगा। उत्पादों की गुणवत्ता, कीमत तय करने, जांच और भुगतान की प्रक्रिया को स्पष्ट करने के लिए विस्तृत एसओपी तैयार की जाएगी। अधिकारियों को इसे जल्द तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार का लक्ष्य सिर्फ सरकारी संस्थानों की जरूरत पूरी करना नहीं है, बल्कि प्रदेश के पारंपरिक बुनकरों को स्थायी बाजार देकर उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करना भी है। इससे हथकरघा उद्योग को बढ़ावा मिलने के साथ नई पीढ़ी को भी इस पारंपरिक कारोबार से जोड़ने में मदद मिल सकती है।
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