OBC क्रीमी लेयर को लेकर अपडेट, केंद्र सरकार की बड़ी मांग

नई दिल्ली। OBC आरक्षण में क्रीमी लेयर के मानदंड को लेकर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। सरकार ने 11 मार्च 2026 के फैसले को तुरंत लागू करने से राहत देने की मांग की है। केंद्र का कहना है कि फैसले को मौजूदा प्रक्रियाओं पर अचानक लागू करने से कई व्यावहारिक और प्रशासनिक जटिलताएं पैदा हो सकती हैं।

क्या था 11 मार्च का फैसला?

सुप्रीम कोर्ट ने मार्च में स्पष्ट किया था कि OBC में क्रीमी लेयर तय करने के लिए सिर्फ माता-पिता की आय को आधार नहीं बनाया जा सकता। माता-पिता का पद और उनकी सामाजिक स्थिति जैसे पहलुओं को भी ध्यान में रखना होगा। कोर्ट ने कहा था कि केवल वेतन के आधार पर समान स्थिति वाले लोगों के साथ अलग-अलग व्यवहार करना उचित नहीं होगा।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा पर असर

केंद्र सरकार ने खास तौर पर UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 के उम्मीदवारों के मामले में राहत मांगी है। सरकार का तर्क है कि परीक्षा की प्रक्रिया काफी आगे बढ़ चुकी है और मार्च का फैसला आने तक CSE-2025 का परिणाम घोषित हो चुका था। ऐसे में नियमों को बीच प्रक्रिया में बदलने से सेवा आवंटन प्रभावित हो सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, UPSC CSE-2025 के लिए अनुशंसित 958 उम्मीदवारों का सेवा आवंटन इस विवाद से जुड़ा हुआ है। केंद्र चाहता है कि इन उम्मीदवारों का सेवा आवंटन उस क्रीमी लेयर व्यवस्था के आधार पर पूरा किया जा सके, जो 11 मार्च के फैसले से पहले लागू थी।

17 सितंबर को होगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल कोई अंतरिम राहत या आदेश जारी नहीं किया है। अदालत ने मामले पर आगे सुनवाई के लिए 17 सितंबर की तारीख तय की है और संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। अब अगली सुनवाई में यह स्पष्ट हो सकता है कि मार्च के फैसले को CSE-2025 जैसे मामलों में किस तरह लागू किया जाएगा।

इस मामले का असर केवल मौजूदा उम्मीदवारों तक सीमित नहीं है। क्रीमी लेयर तय करने के नियमों में बदलाव से आने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं और सरकारी भर्तियों में OBC उम्मीदवारों की पात्रता पर भी असर पड़ सकता है। इसलिए सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर उम्मीदवारों और आरक्षण से जुड़े पक्षों की नजर रहेगी।

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