वैक्‍सीन बनाने के करीब पहुंची ये 6 कंपनियां, बहुत जल्द कोरोना का होगा अंत

न्यूज डेस्क: दुनिया की कई कंपनियां कोरोना वैक्सीन बनाने के करीब पहुंच गयी हैं। अब लोगों को कोरोना के संकट से मुक्ति मिल सकती हैं। आज इसी विषय में जानने की कोशिश करेंगे उन कंपनियों के बारे में जो कंपनियां कोरोना वैक्सीन बनाने के करीब पहुंच गयी हैं। तो आइये इसके बारे में जानते हैं विस्तार से। 
मॉडर्ना: अमेरिका की मॉडर्ना फार्मा पहली ऐसी कंपनी है जिसने अपनी वैक्सीन का मानवीय ट्रायल किया है। मॉडर्ना फार्मा की वैक्सीन में RN नामक मैसेंजर रूपी आनुवांशिक पदार्थ है, जो वायरस की सही सूचना शरीर की प्रतिरोधक क्षमता वाले तंत्र को देता है।
डिस्ट्रीब्यूटेड बायो: इस कंपनी के मुताबिक उनकी टीम ने 2002 में आए सार्स के खिलाफ 5 एंटीबॉडी सफलतापूर्वक हासिल कर लिए हैं। अब उसी आधार पर जो दवा विकसित हो रही है, उसके कोविड-19 केस में कारगर होने की उम्मीद है।

बायोएनटेक और फाइज़र: ये दोनों कंपनियां साथ मिलकर RNA की मदद से टीका बनाने की दिशा में रिसर्च कर रही हैं। इनकी रिसर्च में पाया गया है कि RNA कैसे किसी वायरस की तरह शरीर में प्रोटीन के उत्पादन की पहल कर सकता है। अगर ऐसा हुआ तो वायरस को प्रोटीन के सहारे काबू में किया जा सकेगा।

पिट्सबर्ग यूनिवर्सिटी: ये अमेरिकी शिक्षण संस्थान ऐसी वैक्सीन विकसित कर चुके हैं, जिनका चूहों पर किया गया प्रयोग अब तक सफल रहा है। पिट्सबर्ग वैक्सीन के मुताबिक उनकी बनाई वैक्सीन वायरस को कमज़ोर करने के लिए शरीर में काफ़ी मात्रा में एंटीबॉडी सिर्फ़ 2 हफ्ते में पैदा कर सकती है।

बिल गेट्स फाउंडेशन: बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन बाकी कई दूसरे एनजीओ के साथ मिलकर INO 4800 नाम की वैक्सीन विकसित कर रहे हैं। INO 4800 वैक्सीन मरीज़ के शरीर में एंटीबॉडी पैदा करने में मदद करती है, जो वायरस के संक्रमण से लड़ते हैं।

रूस की रिसर्च: रूस के वेक्टर स्टेट वायरोलॉजी और बायोटेक्नोलॉजी सेंटर में कोरोना वैक्सीन पर तेज़ी से काम चल रहा है। रूस की वैक्सीन के क्लीनिकल ट्रायल 29 जून से शुरू होंगे, जिसमें 180 वॉलंटियर हिस्सा लेंगे।

0 comments:

Post a Comment