1957 से नहीं हुआ बदलाव
पे कमीशन में फैमिली यूनिट का कॉन्सेप्ट 1957 में 15वीं इंडियन लेबर कॉन्फ्रेंस में शुरू किया गया था। तब से अब तक बेसिक सैलरी कैलकुलेशन में केवल तीन सदस्यों वाला परिवार (पति, पत्नी और दो बच्चे) माना जाता रहा है। कर्मचारियों का तर्क है कि आजकल माता-पिता की देखभाल बच्चों की जिम्मेदारी बन गई है, इसलिए फैमिली यूनिट को दो और सदस्यों के साथ बढ़ाने की जरूरत है।
सैलरी पर असर
अगर फैमिली यूनिट 3 से बढ़ाकर 5 की जाती है, तो फिटमेंट फैक्टर में भी बड़ा बदलाव हो सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, दो अतिरिक्त यूनिट जोड़ने से बेसिक सैलरी में लगभग 66% तक की बढ़ोतरी संभव है। वर्तमान में 7वें वेतन आयोग के तहत मिनिमम बेसिक पे 18,000 रुपये है।
नई कैलकुलेशन के आधार पर अनुमान इस प्रकार है:
फिटमेंट फैक्टर 3.0 → नई मिनिमम सैलरी लगभग 54,000 रुपये
फिटमेंट फैक्टर 3.25 → नई मिनिमम सैलरी लगभग 58,500 रुपये
इसका मतलब है कि सिर्फ परिवार यूनिट बढ़ाने से कर्मचारियों और पेंशनभोगियों दोनों को बड़ी राहत मिल सकती है। पेंशनधारकों के लिए भी ज्यादा फिटमेंट फैक्टर का मतलब होगा रिवाइज्ड पेंशन में बढ़ोतरी, जिससे रिटायरमेंट के बाद जीवन अधिक सुरक्षित और आरामदायक बन सके।
कर्मचारी संगठन यह मानते हैं कि फैमिली यूनिट में माता-पिता को जोड़ना अब समय की मांग है। अगर केंद्र सरकार उनकी इस मांग को मानती है, तो 8वें वेतन आयोग के तहत सैलरी में बड़े पैमाने पर बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। यह कदम न केवल कर्मचारियों की वित्तीय स्थिति मजबूत करेगा, बल्कि उनके परिवार की आजीविका और जिम्मेदारियों को भी ध्यान में रखेगा।
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