कर्मचारियों की चिंता दूर होगी या नहीं? 8वें वेतन आयोग में पुरानी पेंशन पर अपडेट

नई दिल्ली। केंद्रीय कर्मचारियों के लिए 8वें वेतन आयोग की चर्चा के साथ ही पेंशन सुधार का मुद्दा फिर से गर्म हो गया है। कर्मचारी संगठन पुरानी पेंशन योजना (OPS) को वापस लाने की मांग जोर-शोर से उठा रहे हैं। उनका तर्क है कि नई पेंशन प्रणालियों में कर्मचारी की आय की निश्चितता नहीं है, इसलिए OPS जैसी स्थिर व्यवस्था फिर से लागू होनी चाहिए।

कर्मचारी संगठन सक्रिय

केंद्रीय कर्मचारियों और श्रमिकों के संगठन जैसे अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी संघ (AIDEF) और एनसी-जेसीएम स्टाफ साइड के प्रतिनिधि OPS बहाली के लिए अपनी मांगें राष्ट्रीय परिषद-संयुक्त परामर्श तंत्र को सौंप चुके हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि नेंशनल पेंशन सिस्टम (NPS) और यूनिफाइड पेंशन सिस्टम (UPS) दोनों को छोड़कर OPS को फिर से लागू किया जाना चाहिए।

UPS का कम रुझान

सरकार द्वारा दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, 30 नवंबर 2025 तक केवल 1.22 लाख केंद्रीय कर्मचारियों ने UPS को अपनाया। जबकि कुल पात्र कर्मचारियों की संख्या लगभग 23–25 लाख थी। इसका मतलब है कि कर्मचारियों में नई पेंशन व्यवस्था के प्रति भरोसा बेहद कम है।

यूनियन का तर्क

यूनियन नेताओं का कहना है कि OPS में कर्मचारी को रिटायरमेंट के बाद अंतिम वेतन का लगभग 50% पेंशन और महंगाई भत्ते (DA) की गारंटी मिलती थी। इसके विपरीत, NPS और UPS में पेंशन की राशि बाजार के रिटर्न पर निर्भर करती है, जिससे भविष्य की आय अस्थिर हो जाती है। यही कारण है कि अधिकांश कर्मचारियों ने UPS को अपनाने से परहेज किया।

सरकार का रुख

सरकार का कहना है कि फिलहाल OPS को बहाल करने का कोई प्रस्ताव नहीं है। उनका तर्क है कि NPS से सरकारी खजाने पर पेंशन का बोझ संतुलित रहता है। UPS जैसे विकल्प से कर्मचारियों को न्यूनतम पेंशन का भरोसा मिलता है और वित्तीय संतुलन भी बना रहता है।

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