रूस से भारत के लिए खुशखबरी, तेल आपूर्ति में मिली राहत

नई दिल्ली। भारत के लिए रूस से एक बड़ी खुशखबरी आई है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट पर तेल सप्लाई में खतरे के बीच, भारत के पास करीब 95 लाख बैरल रूसी कच्चा तेल भारतीय समुद्री क्षेत्र में मौजूद है। जरूरत पड़ने पर इसे तुरंत भारतीय रिफाइनरियों तक भेजा जा सकता है, जिससे देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।

क्यों है यह तेल उपलब्ध?

पिछले कुछ सालों में रूस ने भारी छूट पर तेल बेचकर भारत को बड़ा ग्राहक बनाया। पहले भारत के तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी केवल 1% से भी कम थी, लेकिन अब रूस भारत का प्रमुख तेल सप्लायर बन गया है। भारतीय जलक्षेत्र में यह तेल टैंकरों में रखा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत इस्तेमाल किया जा सके।

भारत की ऊर्जा चुनौतियां

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता है और अपनी मांग का लगभग 90% तेल आयात करता है। होर्मुज स्ट्रेट से करीब 40-50% तेल आयात होने के कारण, अगर यह मार्ग बाधित होता है तो तेल की आपूर्ति पर सीधा असर पड़ सकता है। यही वजह है कि भारत ने वैकल्पिक सप्लाई विकल्पों की तैयारी शुरू कर दी है।

विकल्प और रणनीति

भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठा सकता है:

रूसी तेल की आपूर्ति बढ़ाना – भारतीय जलक्षेत्र में मौजूद तेल जल्दी रिफाइनरियों तक पहुंचाया जा सकता है।

अन्य देशों से आयात – भारत के द्वारा अमेरिका, पश्चिम अफ्रीका और वेनेजुएला जैसे देशों से अतिरिक्त तेल खरीदा जा सकता है।

सऊदी अरब से वैकल्पिक मार्ग – रेड सी पाइपलाइन के जरिए होर्मुज स्ट्रेट को बायपास करके सप्लाई भेजी जा सकती है।

रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (SPR) – देश के SPR में लगभग 30 मिलियन बैरल तेल स्टॉक में है, जिसे जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल किया जा सकता है।

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