इसी संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृषि क्षेत्र को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका मानना है कि यदि भारतीय कृषि उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचेंगे तो किसानों की आय बढ़ेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में नए रोजगार भी पैदा होंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी में कृषि को केवल पारंपरिक उत्पादन तक सीमित नहीं रखा जा सकता। अब जरूरत है कि किसान फसल विविधीकरण अपनाएं और ऐसी फसलों की खेती करें जिनकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अधिक मांग हो।
उच्च मूल्य वाली फसलों पर जोर
सरकार की योजना है कि तटीय और पहाड़ी क्षेत्रों की विशेष जलवायु का लाभ उठाकर उच्च मूल्य वाली फसलों का उत्पादन बढ़ाया जाए। काजू, नारियल, चंदन, कोको और अगरवुड जैसी फसलें अंतरराष्ट्रीय बाजार में अच्छी कीमत दिला सकती हैं। इसी तरह पहाड़ी क्षेत्रों में बादाम, अखरोट और चिलगोजा जैसे ड्राई फ्रूट्स के उत्पादन को बढ़ावा देने की बात भी कही गई है। इससे स्थानीय किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
मत्स्य पालन और कृषि निर्यात
कृषि के साथ-साथ मत्स्य पालन को भी एक बड़े निर्यात क्षेत्र के रूप में विकसित करने की दिशा में सरकार काम कर रही है। समुद्री और मीठे पानी की मछलियों की वैश्विक मांग लगातार बढ़ रही है। यदि इस क्षेत्र में आधुनिक तकनीक और निजी निवेश को बढ़ावा दिया जाए तो यह किसानों और ग्रामीण युवाओं के लिए आय का महत्वपूर्ण स्रोत बन सकता है।
डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन की भूमिका
खेती को आधुनिक और पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटल तकनीक का उपयोग तेजी से बढ़ाया जा रहा है। डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के तहत किसानों की पहचान और उनकी जमीन से संबंधित डेटा को डिजिटल रूप में तैयार किया जा रहा है। इससे सरकार को योजनाओं का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी और बाजार से बेहतर जुड़ाव भी संभव होगा।
ग्रामीण उद्यमिता और महिलाओं की भागीदारी
ग्रामीण विकास में महिलाओं की भूमिका को मजबूत करने के लिए भी विशेष पहल की जा रही है। महिला स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण उद्यमियों को बाजार से जोड़ने के लिए नए मंच तैयार किए जा रहे हैं। इससे गांवों में छोटे-छोटे उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल सकेगी।

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