क्या है मौजूदा व्यवस्था
काफी समय से वेतन आयोग की गणना में यह माना जाता है कि एक सरकारी कर्मचारी के परिवार में तीन इकाइयां होती हैं। इसमें आमतौर पर पति-पत्नी और बच्चों को शामिल किया जाता है। इसी आधार पर न्यूनतम वेतन और अन्य भत्तों की गणना की जाती रही है। यह व्यवस्था कई दशकों से लागू है और पिछले वेतन आयोगों में भी इसी आधार को अपनाया गया था।
संगठनों की नई दलील
अब कई कर्मचारी संगठनों का मानना है कि समय के साथ सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियां बदल चुकी हैं। उनका कहना है कि आज अधिकांश कर्मचारियों पर अपने बुजुर्ग माता-पिता की जिम्मेदारी भी होती है।
संगठनों का तर्क है कि
मौजूदा कानूनों के तहत माता-पिता की देखभाल करना बच्चों की जिम्मेदारी मानी जाती है। बढ़ती उम्र में माता-पिता अक्सर आर्थिक रूप से अपने बच्चों पर निर्भर हो जाते हैं। ऐसे में वेतन तय करते समय उनके खर्च को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। इसी वजह से कर्मचारियों की मांग है कि परिवार की इकाई 3 के बजाय 5 मानी जाए, जिसमें माता-पिता को भी शामिल किया जाए।
कितना बढ़ सकता है वेतन
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि परिवार इकाई बढ़ाने का प्रस्ताव स्वीकार किया जाता है तो फिटमेंट फैक्टर मौजूदा स्तर से काफी ऊपर जा सकता है। उदाहरण के तौर पर यदि किसी कर्मचारी का वर्तमान मूल वेतन करीब ₹78,800 है और मौजूदा गणना के अनुसार फिटमेंट फैक्टर 1.76 लागू होता है, तो उसका संशोधित मूल वेतन लगभग ₹1.38 लाख के आसपास हो सकता है।
वहीं यदि परिवार इकाई को 5 मानते हुए नया फार्मूला लागू किया जाता है तो फिटमेंट फैक्टर करीब 2.4 तक पहुंच सकता है, जिससे मूल वेतन लगभग ₹1.90 लाख के आसपास पहुंचने की संभावना बनती है। यदि इसके साथ विकास या ग्रोथ फैक्टर भी जोड़ा जाता है तो यह आंकड़ा और बढ़ सकता है और वेतन में और अधिक उछाल देखने को मिल सकता है।
अंतिम फैसला सरकार के हाथ में
हालांकि अभी यह केवल कर्मचारी संगठनों की मांग और संभावित गणनाओं पर आधारित चर्चा है। सरकार जब आधिकारिक रूप से 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों पर निर्णय लेगी, तभी यह स्पष्ट हो पाएगा कि वेतन में कितनी बढ़ोतरी होगी और परिवार की इकाई को लेकर क्या बदलाव किए जाएंगे।

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