न्यूज डेस्क: पूरी दुनिया कोरोना की वैक्सीन बनाने में जुटी हैं। लेकिन चीन इसकी दवा बनाने की होड़ में भी सबसे आगे निकल गया है। चीन ने इस महामारी के वैक्सीन के विकास में दूसरे देशों को पीछे छोड़ दिया है। चीन की कोशिश सबसे पहले वैक्सीन को बाजार में उतारने की है ताकि वो महामारी के दौर में भी सौदेबाजी कर सके। दुनिया के कई देश कोरोना वायरस की वैक्सीन बनाने के अभियान में शामिल हो चुके हैं, लेकिन चीन इस रेस में सबसे आगे दिख रहा है।
चीन की मानें तो उसकी वैक्सीन के ट्रायल का दूसरा चरण भी शुरू हो चुका है। इस वैक्सीन को चीन के इंस्टिट्यूट ऑफ बायोटेक्नॉलजी ने तैयार किया है और एकेडमी ऑफ मिलिटरी मेडिकल साइंसेंज ऑफ चाइना ने इसमें मदद की है।
रविवार को मानव शरीर पर दूसरी बार इसका ट्रायल शुरू हुआ है और इस काम में 500 वॉलिंटियर को लगाया गया है। यानि इन 500 वॉलिंटियर्स पर ही इसका क्लीनिकल ट्रायल होना है। चीन में इस वैक्सीन के क्लीनिकल ट्रायल का पहला चरण मार्च में ही पूरा हो गया था और अप्रैल के पहले हफ्ते में दूसरे चरण के ट्रायल पर माथापच्ची शुरू हो गई थी। गुरुवार को ही चीन ने इसके लिए वॉलिंटियर्स को जोड़ने का अभियान शुरू कर दिया था।
अमेरिका के सिएटल और वॉशिंगटन में कैंसर पर्मानेटे रिसर्च फैसिलिटी में वैक्सीन पर काम शुरू होने के तुरंत बाद चीन ने दवाई ढूंढने का काम तेज कर दिया था। इसके बाद से ही दुनिया भर में इस दर्द की दवा बनाने की होड़ शुरू हुई। भारत में भी सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया और भारत बायोटेक लैब वैक्सीन पर काम कर रहा है जबकि ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन में भी वैक्सीन पर तेजी से काम हो रहा है।
फिलहाल इस घातक कोरोना वायरस को रोकने के लिए दुनिया के किसी भी देश के पास कोई दवा मौजूद नहीं है। हालांकि दुनिया के कई देश दवाओं का क्लीनिकल ट्रायल शुरू तो कर चुके हैं, लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि चीन ने वैक्सीन के निर्माण में संभवत: शुरुआती बढ़त ले ली है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, चीन कोरोना वायरस के जीनोम सिक्वेंस की मैपिंग कर चुका है। वह इसलिए क्योंकि वायरस का मामला सबसे पहने चीनी शहर वुहान में ही आया था। चीन ने इसके बाद डब्ल्यूएचओ के साथ जीनोम सिक्वेंस को साझा किया है। अमेरिका और अन्य देशों के साथ भी जीनोम सिक्वेंस को साझा किया है।

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