न्यूज डेस्क: शास्त्रों के अनुसार वट सावित्री व्रत महिलाओं को जरूर रखनी चाहिए। क्यों की इसका फल उसके पति को प्राप्त होता हैं और इससे पति की उम्र भी लंबी होती हैं। आज इसी विषय में जानने की कोशिश करेंगे की वट सावित्री व्रत क्यों मनाया जाता हैं।
शास्त्रों के अनुसार सावित्री अश्वपति की कन्या थी, उसने सत्यवान को पति रूप में स्वीकार किया था। सत्यवान लकड़ियां काटने के लिए जंगल में जाया करता था। सावित्री अपने अंधे सास-ससुर की सेवा करके सत्यवान के पीछे जंगल में चली जाती थी।
एक दिन सत्यवान को लकड़ियां काटते समय चक्कर आ गया और वह पेड़ से उतरकर नीचे बैठ गया। उसी समय भैंसे पर सवार होकर यमराज सत्यवान के प्राण लेने आए। सावित्री ने उन्हें पहचाना और सावित्री ने कहा कि आप मेरे सत्यवान के प्राण न लें।
यमराज ने मना किया, मगर वह वापस नहीं लौटी। सावित्री के पतिव्रत धर्म से प्रसन्न होकर यमराज ने वर रूप में अंधे सास-ससुर की सेवा में आंखें दीं और सावित्री को सौ पुत्र होने का आशीर्वाद दिया और सत्यवान को छोड़ दिया।
वट पूजा से जुड़ी है धार्मिक मान्यता के अनुसार ही तभी से महिलाएं इस दिन को वट अमावस्या के रूप में पूजती हैं। सुहागिन महिलाओं के लिए यह व्रत सबसे लाभकारी माना जाता हैं। सभी महिलाओं को ये व्रत रखनी चाहिए।

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