बता दें की हृदय को पोषण एवं ऑक्सीजन, रक्त के ज़रिए मिलता है जो कोरोनरी आर्टरीज़ द्वारा प्रदान किया जाता है। हृदय के दाहिने एवं बाएं प्रत्येक ओर दो चैम्बर होता हैं। जिसे मेडिकल साइंस में एट्रिअम एवं वेंट्रिकल नाम से जाना जाता हैं। कुल मिलाकर हृदय में चार चैम्बर होते हैं।
ह्रदय का दाहिना भाग शरीर से दूषित रक्त प्राप्त करता है एवं उसे फेफडों में पम्प करता है और रक्त फेफडों में शोधित होकर हृदय के बाएं भाग में वापस लौटता है जहां से वह शरीर में वापस पम्प कर दिया जाता है। यह प्रक्रिया ह्रदय में लगातार होता रहता हैं।
साइंस के अनुसार ह्रदय में चार वॉल्व, दो बाईं ओर (मिट्रल एवं एओर्टिक) एवं दो हृदय की दाईं ओर (पल्मोनरी एवं ट्राइक्यूस्पिड) होते हैं जो रक्त के बहाव को निर्देशित करने के लिए एक-दिशा के द्वार की तरह कार्य करते हैं। एक शिशु का हृदय उसके भ्रूण विकसित होने के 23 दिनों बाद धड़कना शुरू कर देता है जो जिंदगी भर धड़कता रहता हैं।

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