न्यूज डेस्क: आज हम जिसे चीन कहते हैं उसका आधिकारिक नाम है 'पीपल्स रिपब्लिक ऑफ़ चाइना' और हम जिसे ताइवान के नाम से जानते हैं। उसका अपना आधिकारिक नाम है 'रिपब्लिक ऑफ़ चाइना हैं। दोनों के नाम में चाइना जुड़ा हुआ है। आप सोच रहे हैं की ऐसा क्यों तो आइये जानते हैं इसका इतिहास।
दिल्ली की जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर चाइनीज़ एंड साउथ ईस्ट एशियन स्टडीज़ में असिस्टेंट प्रोफेसर गीता कोचर बताती हैं की चीन में साल 1644 में चिंग वंश सत्ता में आया और उसने चीन का एकीकरण किया।
इसके बाद साल 1895 में चिंग ने ताइवान द्वीप को जापानी साम्राज्य को सौंप दिया। लेकिन कुछ समय के बाद 1911 में चिन्हाय क्रांति हुई जिसमें चिंग वंश को सत्ता से हटना पड़ा।
आज के वर्तमान समय में चीन इसे अपना विद्रोही राज्य मानता है जबकि ताइवान ख़ुद को स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र मानता है, वहीं चीन का मानना है कि ताइवान को चीन में शामिल होना चाहिए और फिर इसके लिए चाहे बल प्रयोग ही क्यों न करना पड़े।
ताइवान जानता हैं की चीन उसे बल प्रयोग से कब्ज़ा कर लेगा। इसलिए ताइवान अमेरिका से मदद की गुहार करता हैं। आज के समय में अमेरिका का सैन्य बेस ताइवान के पास मौजूद हैं। जिसके कारण चीन ताइवान को कब्ज़ा करने की हिम्मत नहीं जुटा पाता हैं।

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