10 जून से शुरू होगी प्रक्रिया, 20 जून से सख्ती
सरकारी आदेश के अनुसार ट्रांजिट पास प्रणाली की शुरुआत 10 जून 2026 से की जाएगी, जबकि 20 जून से इसे अनिवार्य रूप से लागू कर दिया जाएगा। इसके बाद बिना ट्रांजिट पास के किसी भी खनिज लदे वाहन को बिहार में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी।
प्रति टन और घनमीटर के हिसाब से शुल्क तय
नई व्यवस्था के तहत खनिज परिवहन पर शुल्क भी निर्धारित किया गया है। वाहनों को 60 रुपये प्रति मीट्रिक टन या 85 रुपये प्रति घनमीटर की दर से ट्रांजिट पास शुल्क देना होगा। बिना शुल्क और पास के परिवहन को अवैध माना जाएगा और कार्रवाई की जाएगी।
डिजिटल सिस्टम से होगी पूरी निगरानी
सरकार ने इस पूरी व्यवस्था को ऑनलाइन और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने का निर्णय लिया है। प्रत्येक वाहन को सिस्टम इंटीग्रेटर के माध्यम से ट्रांजिट पास लेना होगा, जिससे राज्य में आने वाले खनिजों का पूरा रिकॉर्ड डिजिटल रूप में उपलब्ध रहेगा। इससे न केवल निगरानी आसान होगी, बल्कि रियल टाइम डेटा भी प्राप्त किया जा सकेगा।
अवैध खनन और फर्जी चालानों पर रोक
नई व्यवस्था लागू होने के बाद एक ही चालान पर बार-बार खनिज ढुलाई जैसी अनियमितताओं पर रोक लगने की उम्मीद है। इसके अलावा अवैध खनन, भंडारण और राजस्व चोरी पर भी प्रभावी नियंत्रण किया जा सकेगा। सरकार का मानना है कि इससे खनन क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ेगी और अनियमितताओं में कमी आएगी।
निर्माण कार्यों के कारण बढ़ी मांग
बिहार में सड़कों, पुलों और अन्य विकास परियोजनाओं के चलते बालू और पत्थर की मांग तेजी से बढ़ी है। इसी वजह से दूसरे राज्यों से बड़ी मात्रा में खनिजों का परिवहन किया जा रहा है। नई व्यवस्था से इनकी सही निगरानी संभव हो सकेगी।
राजस्व में बढ़ोतरी की उम्मीद
सरकार का कहना है कि इस नई प्रणाली से राज्य के राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी। साथ ही खनन से जुड़ी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता आएगी और अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगेगा।

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