राज्यपाल सचिवालय की ओर से जारी निर्देश के अनुसार, विश्वविद्यालयों में वर्षों से लंबित प्रोन्नति प्रक्रियाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा। इसके लिए 15 जून से प्रक्रिया शुरू कर 15 सितंबर तक सभी लंबित मामलों के निपटारे का लक्ष्य तय किया गया है। इस फैसले से राज्य के हजारों शिक्षकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
लंबे समय से लंबित थे मामले
जानकारी के अनुसार, कई विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की प्रोन्नति से जुड़े मामले लंबे समय से अटके हुए हैं। इस संबंध में राज्यपाल सचिवालय को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि पात्र शिक्षकों के मामलों पर समय पर निर्णय नहीं लिया जा रहा है। इससे शिक्षकों में असंतोष बढ़ रहा था और उनके कैरियर पर भी असर पड़ रहा था। स्थिति को गंभीरता से लेते हुए राज्यपाल ने सभी कुलपतियों को लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे का निर्देश दिया है। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि निर्धारित समयसीमा के भीतर सभी प्रक्रियाएं पूरी कर ली जाएं।
विश्वविद्यालयों को दिए गए स्पष्ट निर्देश
निर्देश पत्र में कहा गया है कि पदोन्नति से संबंधित सभी मामलों की समीक्षा कर नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही अनावश्यक विलंब से बचते हुए पात्र शिक्षकों को समय पर उनका अधिकार दिया जाए। राज्यपाल सचिवालय ने इस प्रक्रिया की नियमित निगरानी करने का भी संकेत दिया है।
इस फैसले से अब शिक्षकों में बढ़ी उम्मीद
राज्यपाल के इस हस्तक्षेप के बाद शिक्षकों में नई उम्मीद जगी है। लंबे समय से पदोन्नति का इंतजार कर रहे प्राध्यापकों को अब उम्मीद है कि उनकी सेवाओं और अनुभव का उचित मूल्यांकन होगा तथा उन्हें समय पर उच्च पदों का लाभ मिल सकेगा।

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