फ्रांस के साथ गहराता रक्षा सहयोग
इस डील के तहत भारत और फ्रांस के बीच गवर्नमेंट-टू-गवर्नमेंट (G2G) मॉडल पर समझौता होने की संभावना है, जिसमें किसी भी मध्यस्थ की भूमिका नहीं होगी। एयर चीफ मार्शल के हालिया फ्रांस दौरे के दौरान इस परियोजना से जुड़े कई अहम पहलुओं पर चर्चा की जा रही है। रक्षा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि यह सौदा दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करेगा।
भारत में होगा राफेल का निर्माण
इस प्रस्ताव की सबसे बड़ी खासियत यह है कि लगभग 114 में से 94 राफेल विमान भारत में ही बनाए जाने की योजना है। यह कदम ‘मेक इन इंडिया’ पहल को बड़ी मजबूती देगा और देश के रक्षा उत्पादन क्षेत्र को नई दिशा प्रदान करेगा। इसके लिए फ्रांसीसी कंपनी और भारतीय साझेदार के बीच सहयोग की संभावना जताई जा रही है।
पहली बार भारत में होगा राफेल निर्माण
यह पहली बार होगा जब राफेल जैसे अत्याधुनिक लड़ाकू विमान का निर्माण फ्रांस के बाहर किया जाएगा। इस परियोजना में लगभग 50 प्रतिशत तक स्थानीय उत्पादन की संभावना है, जिससे भारत के रक्षा उद्योग में तकनीकी आत्मनिर्भरता बढ़ेगी। इससे देश में रोजगार और तकनीकी विशेषज्ञता के नए अवसर भी पैदा होंगे।
भारतीय वायुसेना की बढ़ती जरूरतें
वर्तमान में भारतीय वायुसेना के पास करीब 29 सक्रिय फाइटर स्क्वाड्रन हैं, जबकि आवश्यकता लगभग 42 स्क्वाड्रन की मानी जाती है। सीमावर्ती सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए वायुसेना की क्षमता बढ़ाना रणनीतिक रूप से जरूरी माना जा रहा है। ऐसे में यह प्रस्तावित डील भारतीय वायुसेना के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

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