प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ता बिहार
राज्य सरकार का फोकस अब रासायनिक खेती से हटकर प्राकृतिक खेती की ओर किसानों को प्रेरित करने पर है। कृषि मंत्री ने किसानों से अपील की है कि वे अपनी कम से कम 25 प्रतिशत जमीन पर प्राकृतिक खेती अपनाएं। इसका उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और पर्यावरण को भी सुरक्षित रखना है।
किसानों के लिए 4 बड़ी खुशखबरी
सरकार ने प्राकृतिक खेती को अपनाने वाले किसानों के लिए चार प्रमुख लाभ घोषित किए हैं:
1. प्रति एकड़ ₹4,000 की सहायता राशि
प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को प्रति एकड़ ₹4,000 तक की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी (अधिकतम एक एकड़ तक)। इससे शुरुआती लागत का बोझ कम होगा और किसान आसानी से इस पद्धति को अपना सकेंगे।
2. जैव संसाधन केंद्र के लिए ₹1 लाख की मदद
जैविक खेती को मजबूत बनाने के लिए जैव उत्पादन संसाधन केंद्र स्थापित करने पर किसानों को ₹1,00,000 तक की सहायता दी जाएगी। इससे प्राकृतिक खाद और अन्य संसाधनों की उपलब्धता आसान होगी।
3. कृषि सखियों को ₹5,000 मासिक प्रोत्साहन
राज्य के 38 जिलों में 800 'कृषि सखी' (जीविका दीदियों) को चयनित किया गया है, जिन्हें ₹5,000 प्रतिमाह दिया जा रहा है। ये महिलाएं किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए मार्गदर्शन प्रदान करेंगी।
4. प्रमाणीकरण पर सरकारी सहायता
प्राकृतिक खेती के प्रमाणीकरण के लिए किसानों को प्रति हेक्टेयर ₹2,100 की सहायता दी जाएगी, जिससे उनके उत्पादों को बाजार में बेहतर पहचान मिल सके।
114 नए क्लस्टर बनाने की योजना
वित्तीय वर्ष 2026-27 में राज्य सरकार ने 114 नए कृषि क्लस्टर बनाने की योजना तैयार की है, जिसमें लगभग 5,700 हेक्टेयर क्षेत्र को प्राकृतिक खेती के तहत लाने का लक्ष्य रखा गया है। इससे राज्य में जैविक खेती का दायरा तेजी से बढ़ेगा।
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