क्या होता है फिटमेंट फैक्टर?
फिटमेंट फैक्टर वह गुणांक होता है, जिसके जरिए वर्तमान बेसिक वेतन को संशोधित कर नई बेसिक सैलरी तय की जाती है। किसी भी वेतन आयोग में कर्मचारियों की आय बढ़ाने का यह सबसे महत्वपूर्ण आधार माना जाता है। सरल शब्दों में कहें तो मौजूदा बेसिक वेतन को तय फिटमेंट फैक्टर से गुणा करने के बाद नई बेसिक सैलरी निर्धारित होती है। यही कारण है कि कर्मचारी संगठनों की नजर इस बार फिटमेंट फैक्टर पर टिकी हुई है।
पिछली बार कितना था फिटमेंट फैक्टर?
7वें वेतन आयोग के दौरान फिटमेंट फैक्टर 2.57 निर्धारित किया गया था, जिसके बाद न्यूनतम बेसिक वेतन 7,000 रुपये से बढ़कर 18,000 रुपये हो गया था। वहीं 6वें वेतन आयोग में यह आंकड़ा 1.86 था। अब लगभग एक दशक बाद नए वेतन आयोग की तैयारी के बीच कर्मचारी महंगाई और बढ़ती जीवन-यापन लागत को देखते हुए अधिक फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रहे हैं।
अलग-अलग संगठनों की अलग मांग
कर्मचारी संगठनों ने सरकार के सामने विभिन्न प्रस्ताव रखे हैं। कुछ संगठनों का मानना है कि फिटमेंट फैक्टर 3 या उससे अधिक होना चाहिए, जबकि कुछ ने 4 तक की मांग कर दी है। यदि 3 फिटमेंट फैक्टर लागू होता है तो न्यूनतम बेसिक वेतन 54 हजार रुपये तक पहुंच सकता है। वहीं 3.8 या 3.822 फिटमेंट फैक्टर की स्थिति में यह राशि 68 हजार से 69 हजार रुपये तक पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है। सबसे बड़ी मांग 4 फिटमेंट फैक्टर की है, जिसके लागू होने पर न्यूनतम बेसिक वेतन 72 हजार रुपये तक पहुंच सकता है।
इस सन्दर्भ में विशेषज्ञ क्या मान रहे हैं?
वेतन और वित्तीय मामलों के जानकारों का मानना है कि सरकार कर्मचारियों और वित्तीय संतुलन दोनों को ध्यान में रखते हुए फैसला लेगी। कई विशेषज्ञों का अनुमान है कि फिटमेंट फैक्टर 2.28 से 2.86 के बीच रह सकता है। यदि ऐसा होता है तो वर्तमान न्यूनतम बेसिक वेतन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। हालांकि अंतिम फैसला वेतन आयोग की सिफारिशों और केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद ही स्पष्ट होगा।
0 comments:
Post a Comment