पुल निर्माण की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम की अलीगढ़ इकाई को सौंपी गई है। परियोजना से जुड़ी अधिकांश तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी कर ली गई हैं। विभाग की कोशिश है कि मानसून से पहले निर्माण कार्य का शुरुआती चरण शुरू हो जाए, ताकि परियोजना निर्धारित समय के भीतर पूरी की जा सके।
10 किलोमीटर का अतिरिक्त सफर होगा खत्म
वर्तमान में काली नदी के दोनों किनारों पर बसे गांवों के लोगों को एक-दूसरे क्षेत्र में पहुंचने के लिए करीब 10 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ता है। इससे समय और धन दोनों की बर्बादी होती है। पुल बनने के बाद यह दूरी काफी कम हो जाएगी और लोगों को सीधे आवागमन की सुविधा मिल सकेगी।
किसानों और छात्रों को सबसे ज्यादा लाभ
ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले किसानों को अपनी फसल बाजार तक पहुंचाने में आसानी होगी। वहीं विद्यार्थियों को स्कूल, कॉलेज और कोचिंग संस्थानों तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी। इसके अलावा नौकरीपेशा लोगों और छोटे व्यापारियों को भी आवागमन में बड़ी सुविधा मिलेगी।
पांच करोड़ रुपये की लागत से बनेगा पुल
करीब पांच करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली इस परियोजना से दोनों जनपदों के लगभग 20 हजार लोगों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। पुल बनने के बाद व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और कासगंज तथा एटा के बीच आर्थिक संबंध और मजबूत होंगे।

0 comments:
Post a Comment