यूपी में गन्ना किसानों के लिए खुशखबरी, सरकार ने दी बड़ी सौगात!

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने गन्ना किसानों के हित में एक नई और तकनीकी व्यवस्था लागू करने की तैयारी की है। अब राज्य में गन्ना पर्ची जारी करने की प्रक्रिया GPS आधारित सर्वे के जरिए की जाएगी। इस कदम का उद्देश्य व्यवस्था को पारदर्शी बनाना और किसानों को किसी भी तरह की अनियमितता से बचाना है।

GPS सर्वे से तैयार होगी गन्ना पर्ची

नए पेराई सत्र के तहत अब केवल GPS सर्वे के आधार पर ही किसानों को गन्ना पर्ची मिलेगी। इसमें खेत में बोई गई फसल, गन्ने की किस्म और क्षेत्रफल जैसी सभी महत्वपूर्ण जानकारियां दर्ज होंगी। इस प्रणाली से मिलों और किसानों के बीच पारदर्शिता बढ़ेगी और गलत आंकड़ों की संभावना कम होगी।

प्रदेशभर में तेजी से चल रहा सर्वे

गन्ना विभाग पूरे उत्तर प्रदेश में GPS आधारित सर्वेक्षण का कार्य करा रहा है। अब तक करीब 42 प्रतिशत सर्वे पूरा हो चुका है और इसे 30 जून तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सर्वे पूरा होने के बाद सभी आंकड़े चीनी मिलों द्वारा विभागीय वेबसाइट पर ऑनलाइन अपलोड किए जाएंगे।

किसानों को SMS से मिलेगी जानकारी

सर्वे के दौरान किसानों को पूरी प्रक्रिया की जानकारी मोबाइल SMS के जरिए दी जा रही है। इसमें खेत का सर्वे कब होगा, इसकी सूचना पहले से भेजी जाती है ताकि किसान समय पर अपने खेत पर मौजूद रहें। सर्वे पूरा होने के बाद खेत की जानकारी और फसल विवरण भी SMS के माध्यम से किसानों को उपलब्ध कराया जाएगा।

तकनीकी टीम करेगी सर्वेक्षण

सर्वे टीम में एक राजकीय गन्ना पर्यवेक्षक और चीनी मिल का एक प्रतिनिधि शामिल होता है। ये दोनों मिलकर खेत पर जाकर GPS के जरिए डेटा एकत्र करते हैं और उसे सीधे विभागीय सर्वर पर अपलोड करते हैं। इससे डेटा में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना काफी कम हो जाती है।

नए किसानों का पंजीकरण भी जारी

गन्ना विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि सर्वे के साथ-साथ नए किसानों का पंजीकरण भी किया जा रहा है। इसका उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा किसानों को पेराई सत्र में शामिल करना है। सरकार ने यह नियम भी तय किया है कि 30 सितंबर 2026 तक पंजीकृत किसान ही गन्ना आपूर्ति का लाभ ले सकेंगे।

ऑनलाइन सत्यापन की सुविधा

सरकार ने किसानों की सुविधा के लिए उनकी भूमि का सत्यापन ऑनलाइन उपलब्ध कराया है। अब किसान अपने खेत का रिकॉर्ड राजस्व विभाग की वेबसाइट पर जाकर आसानी से जांच सकते हैं। इस नई व्यवस्था से किसानों को मिलों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और पर्ची प्रणाली अधिक पारदर्शी हो जाएगी। साथ ही फसल का सही आकलन होने से किसानों को उनकी उपज का उचित लाभ मिलने की संभावना बढ़ जाएगी।

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