फिलीपींस, वियतनाम, आर्मेनिया और इंडोनेशिया जैसे देशों में भारतीय हथियारों की मजबूत मांग देखने को मिल रही है। इसके अलावा अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका और मध्य पूर्व के देश भी भारतीय रक्षा उपकरणों में रुचि दिखा रहे हैं। भारत अब दुनिया के 100 से अधिक देशों को रक्षा उपकरण निर्यात कर रहा है।
रक्षा निर्यात में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 38,000 करोड़ रुपये से अधिक का रक्षा निर्यात दर्ज किया है। यह पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि है। भारत ने आने वाले वर्षों में इस आंकड़े को और बढ़ाकर 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। यह वृद्धि दर्शाती है कि भारतीय रक्षा उत्पादों पर वैश्विक भरोसा लगातार बढ़ रहा है।
ब्रह्मोस मिसाइल की बढ़ती वैश्विक मांग
भारत की सबसे उन्नत क्रूज मिसाइलों में से एक ब्रह्मोस को लेकर कई देशों में गहरी रुचि देखी जा रही है। फिलीपींस के साथ पहले ही डील पूरी हो चुकी है, जबकि वियतनाम और अन्य देशों के साथ बड़े रक्षा समझौते सामने आए हैं। इंडोनेशिया जैसे देश भी इस सिस्टम को अपने रक्षा बेड़े में शामिल करने की प्रक्रिया में हैं।
आकाश और पिनाका सिस्टम की पहचान
भारत के स्वदेशी एयर डिफेंस सिस्टम आकाश को कई देशों द्वारा अपनाया जा रहा है। आर्मेनिया जैसे देश पहले ही इस प्रणाली को शामिल कर चुके हैं, जबकि अन्य देशों से भी बातचीत जारी है। वहीं, पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट सिस्टम भी अपनी सटीकता और मारक क्षमता के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इसकी मांग यूरोप और एशिया के कई देशों में देखी जा रही है।
लॉयटरिंग म्यूनिशन और आधुनिक युद्ध तकनीक
भारत द्वारा विकसित लॉयटरिंग म्यूनिशन और ड्रोन आधारित हथियार प्रणाली भी वैश्विक स्तर पर चर्चा में है। कई देश हल्के, सटीक और कम लागत वाले इन हथियारों को अपनी रक्षा रणनीति में शामिल करने में रुचि दिखा रहे हैं। इन प्रणालियों ने आधुनिक युद्ध तकनीक में भारत को एक नई पहचान दी है।

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