मोबाइल ऐप से होगी खाद की बुकिंग
प्रस्तावित योजना के अनुसार, किसान या उनका अधिकृत प्रतिनिधि मोबाइल ऐप पर जमीन और फसल से जुड़ी जानकारी दर्ज कर सकेगा। इसके बाद खाद की अग्रिम बुकिंग की जा सकेगी और पुष्टि होने पर QR Code वाला टोकन मिलेगा। खाद खरीदते समय विक्रेता इसे स्कैन करेगा और आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन के बाद खाद उपलब्ध कराएगा।
केंद्र सरकार इस व्यवस्था को पूरे देश में लागू करने के लिए राज्यों का सहयोग मांग सकती है। दिसंबर के अंतिम सप्ताह में होने वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों के सम्मेलन में इस विषय पर चर्चा होने की संभावना है।
222 जिलों में परीक्षण
रिपोर्ट के मुताबिक, खरीफ 2026 के दौरान 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 222 जिलों में इस व्यवस्था का पायलट परीक्षण किया गया। इस दौरान खाद की बिक्री में 28 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। मध्य प्रदेश में भी खाद की खपत पिछले साल के 36 लाख टन से घटकर 32 लाख टन रह गई। रिपोर्ट के अनुसार, इससे राज्य में 764 करोड़ रुपये की सब्सिडी बचाने में मदद मिली।
खाद सब्सिडी का बढ़ता खर्च बनी चिंता
केंद्र सरकार के लिए खाद सब्सिडी पर बढ़ता खर्च बड़ी चुनौती है। वित्त वर्ष 2025-26 में इस मद में 2.17 लाख करोड़ रुपये खर्च हुए, जबकि 2026-27 के बजट में 1.71 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया, LNG और DAP की कीमतों में बढ़ोतरी से खर्च और बढ़ने की आशंका है।
सरकार की इस प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य सब्सिडी के दुरुपयोग को रोकना और खाद वितरण को अधिक पारदर्शी बनाना है। हालांकि, किसानों को इसका वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब उन्हें अपनी जरूरत के अनुसार समय पर खाद उपलब्ध हो सकेगा।

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