यूरोप में भारत बना तीसरा बड़ा सप्लायर
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, यूरोप में भारतीय गोला-बारूद और सैन्य सामग्रियों की आपूर्ति में बीते वर्षों के दौरान तेज बढ़ोतरी हुई है। रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, यूरोप को भारत का संबंधित रक्षा निर्यात 2021-22 के आसपास करीब 413 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में लगभग 7,325 करोड़ रुपये हो गया। इस श्रेणी में भारत यूरोप का तीसरा बड़ा आपूर्तिकर्ता बना।
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोपीय देशों ने अपनी सैन्य तैयारियां बढ़ाई हैं। हथियारों और गोला-बारूद की मांग बढ़ने से कई देश दूसरे देशों से आपूर्ति लेने लगे हैं। दक्षिण कोरिया और स्पेन जैसे देशों के साथ भारत भी इस मांग को पूरा करने में अहम भूमिका निभा रहा है।
विस्फोटकों की आपूर्ति में बड़ी उपलब्धि
रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में यूरोप को करीब 427 करोड़ रुपये के विस्फोटकों की आपूर्ति के साथ भारत इस श्रेणी में शीर्ष स्थान पर रहा। वहीं, प्रोपेलेंट पाउडर के निर्यात में भारत लगभग 883 करोड़ रुपये की आपूर्ति के साथ दूसरे स्थान पर बताया गया है। ये आंकड़े यूरोपीय बाजार में भारतीय रक्षा उद्योग की बढ़ती मौजूदगी को दर्शाते हैं। हालांकि, वैश्विक हथियार निर्यात के मामले में तस्वीर अलग है।
देश में भी तेजी से बढ़ रहा रक्षा उत्पादन
भारत में हथियार और सैन्य उपकरण बनाने की क्षमता भी बढ़ रही है। उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में देश का रक्षा उत्पादन लगभग 1.78 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले करीब 15.6 प्रतिशत अधिक है।
इस क्षेत्र में सरकारी कंपनियों के साथ निजी कंपनियां, छोटे उद्योग और स्टार्टअप भी योगदान दे रहे हैं। घरेलू उत्पादन बढ़ने से भारत को अपनी सेना की जरूरतों को पूरा करने और दूसरे देशों को रक्षा उत्पाद बेचने में मदद मिल रही है। सरकार ने वर्ष 2029 तक रक्षा उत्पादन को 3 लाख करोड़ रुपये और रक्षा निर्यात को 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव?
रक्षा निर्यात में बढ़ोतरी से देश को आर्थिक लाभ मिलने के साथ घरेलू उद्योगों को भी नए अवसर मिल सकते हैं। इससे रोजगार, तकनीकी विकास और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलने की संभावना है। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय कंपनियों की पहचान मजबूत हो सकती है।
हालांकि, रक्षा क्षेत्र में भारत की दीर्घकालीन सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि देश गुणवत्ता, समय पर आपूर्ति और आधुनिक तकनीक के मामले में कितना आगे बढ़ता है। रिकॉर्ड निर्यात एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, लेकिन वैश्विक रक्षा बाजार में लगातार मजबूत बने रहने के लिए निवेश और अनुसंधान पर भी ध्यान देना होगा।
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