अब ऑनलाइन करना होगा आवेदन
नए नियम के मुताबिक, शिक्षकों को छुट्टी पर जाने से पहले पोर्टल या ऐप के माध्यम से आवेदन करना होगा। इससे आवेदन और उसकी मंजूरी का रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध रहेगा। बिना स्वीकृति के छुट्टी लेने पर कार्रवाई हो सकती है।
नए शिक्षकों की अर्न्ड लीव पर भी नियम
दी गई जानकारी के अनुसार, नए शिक्षकों को शुरुआती तीन साल तक उपार्जित अवकाश (EL) नहीं मिलेगा। वहीं, 11 महीने काम करने पर एक महीने के बिना वेतन वाले अवकाश का प्रावधान बताया गया है। शिक्षक एक बार में अधिकतम दो महीने तक छुट्टी ले सकेंगे। अलग-अलग अवकाश के लिए संबंधित शर्तें लागू रहेंगी।
छुट्टी की मंजूरी के लिए तय हुई समय-सीमा
आकस्मिक और विशेष अवकाश के आवेदन पर प्रधानाध्यापक या प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO) को उसी दिन फैसला लेना होगा। वहीं, मातृत्व, शिशु देखभाल और चिकित्सा अवकाश से जुड़े आवेदन तीन कार्य दिवसों के भीतर जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) को भेजने होंगे। यदि आवेदन तय समय में आगे नहीं बढ़ाया जाता है, तो वह स्वतः DEO के पास पहुंच जाएगा। जिला शिक्षा पदाधिकारी को अधिकतम सात कार्य दिवसों में उस पर निर्णय लेना होगा।
बिना मंजूरी अनुपस्थित रहने पर हो सकती है कार्रवाई
बिहार सेवा संहिता के नियम-152 के अनुसार, छुट्टी को अधिकार नहीं माना गया है। ऐसे में स्वीकृति के बिना अनुपस्थित रहने पर वेतन रोके जाने या सेवा से संबंधित कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के अनुसार, नई व्यवस्था का उद्देश्य छुट्टी की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना, आवेदन समय पर निपटाना और अधिकारियों की जवाबदेही तय करना है।

0 comments:
Post a Comment