137 दवाओं के ट्रेड मार्जिन पर लगाम
सरकार ने 137 नॉन-शेड्यूल्ड एंटी-कैंसर दवाओं के ट्रेड मार्जिन को 30 प्रतिशत तक सीमित करने का फैसला किया है। इसका उद्देश्य दवाओं की बिक्री और वितरण के दौरान लिए जाने वाले अधिक मार्जिन को कम करना और मरीजों तक जरूरी दवाएं कम कीमत पर पहुंचाना है।
इन कैंसर दवाओं की कीमतों में बड़ी कटौती
संशोधित कीमतों में कई दवाएं शामिल हैं, जिनका इस्तेमाल अलग-अलग प्रकार के कैंसर के इलाज में होता है। कुछ उदाहरण देखिए:
एनार्ज़ोल (1 mg): 10 टैबलेट के पैक की कीमत ₹695.76 से घटकर ₹73 हो जाएगी।
बेवासिजैब इंजेक्शन (4 ml): इसकी कीमत ₹21,767.70 से घटकर ₹5,930.13 होगी।
एज़ासिटिन इंजेक्शन: कीमत ₹6,337 से कम होकर ₹1,495.04 रह जाएगी।
दसनत 20 mg टैबलेट: कीमत ₹2,812.50 से घटकर ₹1,085.93 हो जाएगी।
फुलब्रेका इंजेक्शन: कीमत ₹26,072.16 से कम होकर ₹5,491 रह जाएगी।
इन उदाहरणों से स्पष्ट है कि कुछ दवाओं के दाम में बड़ी कमी की गई है। हालांकि, वास्तविक बचत संबंधित दवा के ब्रांड और संशोधित कीमत पर निर्भर करेगी।
हर साल ₹2,500 करोड़ की बचत का अनुमान
सरकार का अनुमान है कि इस पहल से कैंसर के मरीजों को सालाना करीब ₹2,500 करोड़ की बचत हो सकती है। संशोधित सूची में ब्रेस्ट, प्रोस्टेट, कोलन, ओवेरियन और सर्वाइकल कैंसर के उपचार में इस्तेमाल होने वाली दवाएं शामिल हैं। इसके अलावा कीमोथेरेपी, इम्यूनोथेरेपी और टारगेटेड ट्रीटमेंट से जुड़ी कुछ दवाओं को भी इसमें शामिल किया गया है।
9 नवंबर से नई कीमतों का पालन जरूरी
निर्धारित तारीख से खुदरा विक्रेताओं और अस्पतालों को संशोधित कीमतों के अनुसार दवाएं उपलब्ध करानी होंगी। दवा निर्माता कंपनियों को सप्लाई चेन में हुए बदलावों की जानकारी भी देनी होगी, जबकि राज्य के औषधि नियंत्रकों से नियमों के पालन पर निगरानी रखने की अपेक्षा की गई है।

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