सबसे ज्यादा चर्चा गेहूं के MSP को लेकर है। सरकार ने गेहूं के समर्थन मूल्य में 25 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की है। इसके बाद गेहूं का नया MSP बढ़कर 2,610 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। गेहूं के अलावा जौ, चना, मसूर, रेपसीड-सरसों और कुसुम के समर्थन मूल्य में भी बदलाव किया गया है।
छह फसलों की नई MSP दरें
रबी सीजन की प्रमुख फसलों में जौ का MSP अब 2,286 रुपये प्रति क्विंटल होगा। चने के लिए किसानों को 5,958 रुपये प्रति क्विंटल का समर्थन मूल्य मिलेगा। इसी तरह मसूर का MSP 7,390 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। वहीं, रेपसीड और सरसों का नया समर्थन मूल्य 6,613 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है, जबकि कुसुम का MSP बढ़कर 7,215 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। सरकार के मुताबिक, इन दरों को तय करते समय कृषि लागत और बाजार की परिस्थितियों को ध्यान में रखा गया है।
करीब 91 हजार करोड़ का भुगतान
सरकार की रबी मूल्य नीति के तहत इन फसलों की खरीद के लिए किसानों को अनुमानित तौर पर 90,962 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाएगा। MSP निर्धारित करने में कृषि लागत एवं मूल्य आयोग यानी CACP की सिफारिशों को आधार बनाया गया है। फसल उत्पादन में आने वाली लागत के साथ-साथ घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों के रुझान को भी फैसले में शामिल किया गया है।
लागत से ऊपर MSP रखने पर जोर
सरकार की ओर से तय की गई नई दरों में उत्पादन लागत के मुकाबले अलग-अलग फसलों पर अलग मार्जिन रखा गया है। गेहूं का MSP अनुमानित उत्पादन लागत से करीब 106 प्रतिशत अधिक है। वहीं रेपसीड-सरसों पर यह मार्जिन 96 प्रतिशत और मसूर पर 92 प्रतिशत बताया गया है। चना, जौ और कुसुम के मामले में लागत के ऊपर क्रमशः करीब 59 प्रतिशत, 58 प्रतिशत और 50 प्रतिशत का मार्जिन रखा गया है।

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