गन्ना आयुक्त मिनस्थी एस. की अध्यक्षता में हुई उत्तर प्रदेश बीज गन्ना एवं गन्ना किस्म स्वीकृति उप समिति की बैठक में नई किस्मों के प्रदर्शन से जुड़े आंकड़ों पर चर्चा हुई। इसके बाद शाहजहांपुर स्थित उप्र गन्ना शोध परिषद की तीन और भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, लखनऊ की एक किस्म को खेती के लिए अवमुक्त किया गया।
को.शा.23232 को माना जा रहा बेहतर विकल्प
नई अगेती किस्म को.शा.23232 को पुरानी प्रमुख किस्म को.0238 के विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। इसका पौधा गन्ना उत्पादन औसतन 95.56 टन प्रति हेक्टेयर दर्ज किया गया, जबकि इसकी पेड़ी की उपज 80.57 टन प्रति हेक्टेयर रही। इसे लाल सड़न रोग के प्रति रोगरोधी और अच्छी पेड़ी क्षमता वाली किस्म बताया गया है। इसे पूरे प्रदेश में खेती के लिए मंजूरी मिली है।
भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान की अगेती किस्म को.लख.21201 को भी पूरे प्रदेश में उगाने की अनुमति दी गई है। इसकी औसत उपज 86.57 टन प्रति हेक्टेयर और पोल इन केन 13.94 प्रतिशत दर्ज हुआ है।
दो अन्य किस्मों को भी मिली मंजूरी
मध्य एवं देर से पकने वाली को.शा.19235 और को.शा.18232 को भी खेती के लिए स्वीकृति दी गई है। को.शा.19235 की औसत उपज 87.58 टन और को.शा.18232 की 92.38 टन प्रति हेक्टेयर रही। अधिकारियों के मुताबिक इन किस्मों के आंकड़े भी पुराने मानक की तुलना में बेहतर रहे हैं।
बैठक में केंद्र सरकार से अधिसूचित आठ अन्य किस्मों को भी प्रदेश में खेती के लिए स्वीकार किया गया। वहीं छह पुरानी और कम प्रचलित किस्मों को अगले दो वर्षों में चरणबद्ध तरीके से खेती से बाहर करने का फैसला लिया गया है।
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