यूपी में जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र को लेकर बड़ा बदलाव! नई व्यवस्था हुई लागू

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने की प्रक्रिया में बदलाव अब लागू हो गया है। नए नियम के तहत दो साल से अधिक पुराने जन्म या मृत्यु के मामलों का पंजीकरण प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद ही किया जाएगा। यानी ऐसे मामलों में अब केवल प्रशासनिक स्तर से आदेश लेकर प्रमाणपत्र बनवाना संभव नहीं होगा।

देरी से आवेदन पर अलग-अलग नियम

यदि जन्म या मृत्यु की सूचना एक साल के बाद लेकिन दो साल के भीतर दी जाती है, तो संबंधित मामले में जिला मजिस्ट्रेट (DM), उपजिलाधिकारी (SDM) या अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट के सत्यापन और आदेश के बाद पंजीकरण किया जा सकेगा।

वहीं, दो साल से ज्यादा समय बीतने के बाद आवेदन करने पर प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश अनिवार्य होगा। इसके बाद ही जन्म या मृत्यु का पंजीकरण आगे बढ़ाया जाएगा।

पुराने मामलों में बढ़ी प्रक्रिया

नई व्यवस्था के बाद नगर निकायों में दो साल से पुराने मामलों की प्रक्रिया भी बदल गई है। केंद्रीय जन्म-मृत्यु पंजीकरण पोर्टल पर ऐसे आवेदन दर्ज करते समय न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश की जानकारी मांगी जा रही है। इससे पुराने मामलों के आवेदकों को पहले अदालत से आवश्यक आदेश प्राप्त करना होगा।

यह बदलाव जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 में किए गए संशोधन के बाद लागू किया गया है। इसका उद्देश्य देरी से होने वाले पंजीकरण की प्रक्रिया में सत्यापन और कानूनी निगरानी को मजबूत करना है।

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